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'अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब कर रहे केजरीवाल'

Tue, 04 Aug 2015 06:12 PM IST
विजय सिंघल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार के विज्ञापन मामले में बहस करते हुए याची ‘न्याय पथ’ के अधिवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विज्ञापनों में टारगेट कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री के खिलाफ टिप्पणी से कोई पब्लिक उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा बल्कि दिल्ली सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए विश्वभर में केंद्र सरकार को बदनाम कर देश की आर्थिक हालत पर गलत संदेश दे रही है।

अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जवाब तलब किया है।

न्यायमूर्ति वीपी वैश के समक्ष आनंद पर्वत में एक युवती मीनाक्षी की मौत मामले में दिल्ली सरकार द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र को लेकर जारी विज्ञापन पर दिल्ली सरकार व याची ‘न्याय पथ’ के अधिवक्ता के बीच जमकर बहस हुई।
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हर मुद्दे को दिया जा रहा है राजनीतिक रंग

दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। याची न्याय पथ के अधिवक्ता चेतन शर्मा ने अदालत के समक्ष विज्ञापन की प्रति पेश करते हुए कहा कि मीनाक्षी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उसे 8 बार चाकू लगे हैं।

लेकिन केजरीवाल विज्ञापन में 32 बार चाकू लगा बताकर प्रधानमंत्री से दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के पत्र के विज्ञापन पूरी दिल्ली में लगे हैं, जिनमें वीआईपी क्षेत्र, एयरपोर्ट आदि भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में विभिन्न देशों के राजनयिक रहते हैं और हवाई अड्डे पर उतरते ही विदेशियों की नजर विज्ञापनों पर पड़ती है। ऐसे विज्ञापनों से नकरारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे समझते है कि भारत में अराजकता का माहौल है।
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कोर्ट ने मामले को बताया गंभीर

प्रधानमंत्री व दिल्ली पुलिस के प्रति की गई टिप्पणियों से विश्वभर में भारत की छवि खराब हो रही है। भारत में इसका निवेश पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में इन विज्ञापनों पर तुंरत रोक लगाई जाए।

दिल्ली सरकार के अधिवक्ता रमन दुग्गल ने कहा कि यह राजनीतिक बयान है और राजनीति कर रहे हैं। दुग्गल के तर्क पर अधिवक्ता नीरज ने कहा कि यह राजनीति नहीं है और गंभीर मामला है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यह गंभीर मामला है।

अदालत ने दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता अनिल सोनी को भी कहा कि वे भी छह अगस्त तक स्पष्ट करें कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार विज्ञापनों की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का कब गठन कर रही है।
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