फरवरी 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीतीं और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई। हालांकि सत्ता में आने के बाद से ही दिल्ली सरकार, एलजी और केंद्र सरकार के बीच अधिकारों को लेकर लड़ाई शुरु हो गई।
मामला इस हद तक बढ़ा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली सरकार के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी ताकि स्पष्ट हो सके कि दिल्ली में अंतिम फैसला लेने का अधिकार किसे है।
सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया जबकि दिल्ली हाई कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है इसलिए यहां सरकार को वो अधिकार प्राप्त नहीं हैं जो अन्य राज्यों में होते हैं।
अब ये चार काम नहीं कर पाएगी दिल्ली सरकार
केजरीवाल
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दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ये चार काम नहीं कर पाएगी...
1 अब दिल्ली सरकार किसी भी प्रकार के जांच आयोगों की नियुक्ति नहीं कर पाएगी। इसके लिए सरकार को एलजी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
2 दिल्ली सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में काम करने वाले केंद्रीय सरकार के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर पाएगी।
3 कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली सरकार कोई भी नीतिगत फैसला बिना एजली की सहमति के नहीं ले पाएगी।
4 दिल्ली में जमीन के अधिग्रहण और उससे संबंधित कोई भी फैसला लेने का अधिकार अब दिल्ली सरकार के पास नहीं होगा।
ये हैं सबसे विवादित मुद्दे
दिल्ली सरकार ने कुल नौ मामलों में कोर्ट के सामने याचिकाएं दाखिल की जिनमें से पांच ऐसे मामले हैं जिन्हें लेकर सबसे ज्यादा विवाद रहा है। जो इस प्रकार हैं
1. दिल्ली में एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकार क्षेत्र को लेकर शुरु से ही विवाद रहा है। एसीबी ने जैसे ही दिल्ली में नियुक्त कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाई की उसे एलजी ने अवैध घोषित कर दिया था।
2. दिल्ली में सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच के लिए दिल्ली सरकार ने एसएन अग्रवाल कमेटी का गठन किया था जिसे भी कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया।
3. इसी तरह दिल्ली में डीडीसीए में हुई अनिमितताओं की जांच के लिए दिल्ली सरकार ने गोपाल सुब्रहण्यम कमेटी का गठन किया था जिसे आज कोर्ट ने गलत साबित कर दिया।
4. केजरीवाल सरकार के विरोध के बावजूद एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख के तौर पर मुकेश कुमार मीणा व अन्य अफसरों की नियुक्ति की गई जिसे कोर्ट ने सही बताया है।
5. दिल्ली सरकार के सर्किल रेट के नोटिफिकेशन और इस पर दिल्ली के उपराज्यपाल के आदेश को चुनौती दी गई जिसमें कोर्ट ने एलजी के अधिकारों को मान्यता दी।