मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा के एक कार्यक्रम में कहा कि कैबिनेट ने दिल्ली जनलोकपाल बिल पास कर दिया है। जो वादा किया था, उसे पूरा कर रहे हैं।
बिल को लेकर कई तरह की बातें की जा रहीं थीं, लेकिन इसे कैबिनेट ने पास कर दिया। उन्होंने कहा कि विधेयक जल्द विधानसभा में पेश होगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी फैसला करेगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सरकार की कोशिश होगी कि इसी सत्र में बिल पास किया जाए। उधर,उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कैबिनेट की बैठक के बाद विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अन्ना आंदोलन के समय जो जनलोकपाल बिल लेकर चले थे, उसे पास कर दिया गया है।
ये सिर्फ स्लोगन नहीं है, सख्त लोकपाल है
बिल का नाम दिल्ली जनलोकपाल बिल-2015 होगा। यह आंदोलन की बड़ी जीत है। इसलिए कैबिनेट की बैठक विधानसभा में की है। ये सिर्फ स्लोगन नहीं है, सख्त लोकपाल है।
यह उत्तराखंड लोकपाल बिल की तर्ज पर बना है। इसकी परिधि में मुख्यमंत्री होंगे और समयबद्ध जांच होगी। कैबिनेट बैठक के पहले हुई विधानसभा की कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जनलोकपाल बिल पर चर्चा के लिए कार्यस्थगन प्रस्ताव भी दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने बिल पेश करने का आश्वासन देकर व्यवस्था दे दी थी। इसके अलावा, कांग्रेस ने विस पर विरोध प्रदर्शन दोपहर को किया था।
जनलोकपाल या लोकायुक्त अधिनियम संशोधन
सीएम और डिप्टी सीएम के दावों के बावजूद विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जनलोकपाल बिल के बजाय टुकड़ों में लोकायुक्त संशोधन विधेयक, समयबद्ध सेवा में सजा का प्रावधान, सरकारी अधिकारियों को लोकायुक्त के आधीन करना और विजिलेंस के नए ढांचे को एक करके सरकार उसे जनलोकपाल के तौर पर पेश करेगी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने लोकायुक्त विधेयक में संशोधन का जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें चुने हुए प्रतिनिधि के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों को भी दायरे में लाने का प्रावधान है। लोकायुक्त को भ्रष्टाचार के मामले में संज्ञान लेने या अपनी विशेष गठित टीम से जांच कराने का अधिकार होगा। इतना ही नहीं, सजा देने की शक्ति भी लोकायुक्त को होगी।
सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त संशोधन विधेयक में एक लोकायुक्त व दो सदस्यों की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, दिल्ली लोकायुक्त के दायरे में दिल्ली पुलिस, डीडीए और एमसीडी भी होगी।