सुप्रीम कोर्ट ने भले ही कह दिया हो कि सरकारी विज्ञापनों पर सीएम या मंत्रियों के नाम या फोटो का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है लेकिन, दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने इससे बचने का तरीका निकालते हुए सरकारी विज्ञापनों पर 526.19 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान बनाया है।
अरविंद केजरीवाल अब भले ही पोस्टरों में दिखाई नहीं देंगे या टीवी पर उनका ऐड न दिखे लेकिन, रेडियो पर उन्हें सुनाने का पूरा प्लान पार्टी ने तैयार कर लिया है।
दिल्ली में तो इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। आज कल कुछ रेडियो चैनलों पर 76 सेकेंड लंबा दिल्ली सरकार का एक ऐड चलाया जा रहा है जिसे दिन में कम से कम 40 बार सुना जा सकता है।
इस ऐड में केजरीवाल लोगों को सरकार की उपलब्धियों के बारे में बता रहे हैं। 'जो कहा सो किया' वाले इस रेडियो विज्ञापन में बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने दिल्ली की जनता से जो वादा किया उसे पूरा करने के लिए उन्होंने इस बजट में क्या-क्या प्रावधान किए हैं।
सूत्रों की मानें तो सरकार ने रेडियो पर प्रचार के लिए 50 लाख रुपये खर्च करने की योजना बनाई है और ये ऐड इसी हफ्ते रेडियो पर सुनाई भी पड़ने लगेंगे।
प्रचार के लिए बजट में दिए 526 करोड़
बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि सरकारी विज्ञापनों के होर्डिंग या बिलबोर्ड में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा किसी राजनीतिक हस्ती की फोटो का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
आम आदमी पार्टी ने इस आदेश का उल्लंघन करने से बचने के लिए नया तरीका निकाला है। अखबारों और टीवी में चेहरा दिखाने की परेशानी से बचने के लिए उन्होंने रेडियो पर प्रचार का तरीका निकाला है जिसमें केजरीवाल की तस्वीर तो नहीं दिखाई देगी लेकिन उनकी आवाज सुनाई देगी।
इतना ही नहीं दिल्ली सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए सूचना प्रसारण विभाग के लिए 520 करोड़ रुपये का बजट अलग से तय किया है जिसे सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए खर्च करने की योजना है।
2019 प्रतिश्ात बढ़ाया ऐड का बजट
आप के इन खर्चों से बौखलाई विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक तरफ तो सरकार कहती है कि दिल्ली में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए उनके पास पैसा नहीं है। जबकि यही सरकार विज्ञापनों पर 526 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना चुकी है।
अजय माकन ने ट्वीट कर बताया है कि पिछले बजट (2014-15) में प्रचार पर मात्र 24 करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान था, जबकि इस सरकार ने 526.19 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है जो पिछले बजट प्रावधान से 2019 फिसदी ज्यादा है।
आम आदमी पार्टी ने भी इस आरोप से सीधे-सीधे इनकार नहीं किया है। आप के नेता दिलीप पांडे ने बस इतना कहा कि कांग्रेस बढ़ा-चढ़ा कर बजट बता रही है लेकिन, प्रचार पर कितनी धनराशि खर्च की जानी है इस बारे में तो सरकार ही सही से बता सकती है।
Is it to purchase media?
Amount on Public Relation/Publicity-
2014-15 Rs 24cr
AAP Budget Rs 526.19cr
2019% increase! pic.twitter.com/8rMPyH7X7o— Ajay Maken (@ajaymaken) July 2, 2015
जल्द आने वाले हैं कई नए ऐड
चौंकाने वाली बात ये है कि दिल्ली में पहली बार ऐड पर खर्च के लिए कनसॉलिडेटेड फंड में प्रावधान किया गया है। जबकि इससे पहले हर विभाग अपने लिए प्रचार और खर्च की योजना खुद ही बनाता था।
आज कल रेडियो पर चल रहे प्रचार में बताया जा रहा कि कैसे आप सरकार ने शिक्षा पर बजट को दो गुना कर दिया है, जबकि स्वास्थ्य पर खर्च होने वाले बजट को 45 फिसदी तक बढ़ाया है।
सूत्रों की मानें तो सरकार जल्द ही एक नया टीवी ऐड लेकर आ रही है जिसमें छात्रों को दिए जाने वाले 10 लाख के एजूकेशन लोन के बारे में बताया जाएगा। हालांकि बिजली के बिलों में आई कमी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पर बने उनके टीवी ऐड पर पहले ही काफी विवाद हो चुका है।
'मीडिया को खरीदने की कोशिश'
'आप' के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण ने भी आम आदमी पार्टी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस तरह से प्रचार करना सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का सीधा उल्लंघन है। उनका कहना है कि वह भी इस मामले को गंभीरता से देखेंगे और जरूरी हुआ तो इसके खिलाफ कदम भी उठाएंगे।
अजय माकन का अरोप है कि मीडिया पर आरोप लगाने वाली आप सरकार ने अब मीडिया को खरीदने का मन बना लिया है। यही कारण है कि जनता के पैसे को खुद के प्रचार के लिए पानी की तरह बहाया जा रहा है।
देखना दिलचस्प होगा कि आप सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खुद को बचाने के लिए क्या तरीका अपनाती है।