एमसीडी प्रतिवर्ष मानसून से पहले पुरानी इमारतों की स्थिति के बारे में सर्वेक्षण करती है। उसने इस वर्ष भी पुरानी इमारतों का सर्वे किया गया था। इस दौरान एमसीडी ने इस इमारत को सुरक्षित घोषित किया था। इस तरह यहां रहने व कार्य करने वाले लोगों को यह भरोसा था कि वे सुरक्षित हैं। मगर यह इमारत इस साल बारिश नहीं झेल पाई और बुधवार को गिर गई। इस तरह एमसीडी के सर्वे के साथ-साथ उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना शुरू हो गया है।
इमारत खतरनाक घोषित होने पर कराई जाती खाली
एमसीडी के सर्वेक्षण में इमारत खतरनाक या फिर जर्जर हालत में मिलने पर उसे खाली कराने व मरम्मत करने का आदेश देेने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, इमारत अत्यधिक जर्जर होने पर उसे गिराया भी जा सकता है। एमसीडी की ओर से खतरनाक इमारतों को खाली करानेे के आदेश देती रही है और उनकी मरम्मत कराने का भी नोटिस देती आई है।
पूरा इलाका खतरनाक, चल रहीं हजारों फैक्ट्रियां
विभिन्न एजेंसियों की लापरवाही राजधानी में हर साल सैकड़ों जान जा रही हैं। कभी अवैध फैक्टरी में आग लगने बेगुनाहों की जान जाती है तो कभी इमारत ढह जाने से। बुधवार को बापा नगर इलाके में गिरी इमारत ऐसी जगह पर थी जहां पर राहत बचाव कार्य करना बेहद कठिन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में अवैध तरीके से हजारों फैक्ट्रियां संचालित हैं। उनकी इमारत भी जर्जर स्थिति में है।
आने वाले दिनों में यदि कोई और इमारत गिरती तो उसमें भी राहत बचाव के दौरान मशीनें मौके पर नहीं पहुंच पाएंगी। क्षेत्र में कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंच पाती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां के रहने वाले अधिकतर लोगों ने इमारतें या तो लीज पर दिया हुआ है या फिर किराए पर दे दिया है।
बुधवार सुबह तकरीबन 9:15 बजे बज रहे थे। करोल बाग की संकरी गलियों में नजारा आम दिनों की तरह था। लोगों का अपने काम पर आना-जाना लगा हुआ था। कुछ बच्चे भी गली में चहलकदमी कर रहे थे। इसी बीच गली की एक इमारत भरभराकर गिरी। धमाके से बगल के मकान हिल गए और धूल का गुबार आस-पास के घरों में दाखिल होता है। इससे पहले लोग कुछ समझ पाते, चारों ओर चीख-पुकार मच गई। गली में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। बचाओ-बचाओ की चीख पुकार से पूरा इलाका गूंजने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बिल्डिंग गिरते वक्त गली में भगदड़ की स्थिति थी। लोगों के रोने की आवाजें आ रही थीं। मलबे में दबे कुछ लोगों की आवाज भी साफ सुनाई पड़ रही थी। लोग मदद की गुजार लगा रहे थे। कोई पुलिस को फोन कर रहा है, तो कोई फायर विभाग से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। यही नहीं, कुछ लोगों ने एंबुलेंस को भी बुला लिया।
सरकारी सहायता कोई पहुंच पाती, इससे पहले ही लोगों ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आनन-फानन में मलबा उठाने लगे। जिंदगियों को बचाने के लिए लोगों को जो मिला वह अपने-अपने घरों से लोहे का डंडा, पाइप, डंडे सब ले आए। लोगों ने अपने हाथ में मोर्चा संभाल लिया।
मौके पर मौजूद सलीम खान मायूसी के साथ बताते हैं कि कुछ समय पहले ही वह गिरी इमारत के पास से निकले थे। वह आसमान की ओर देखते हुए कहते हैं कि ऊपर वाले का शुक्र है कि वह बच गए। वह कहते हैं कि हादसा इतना भयानक था कि समय ही नहीं मिला कुछ समझने का।
लोगों ने ही शुरु किया बचाव अभियान
स्थानीय लोगों ने बचाव अभियान शुरू किया। जब तक दमकल विभाग और पुलिस नहीं आ गई तब तक वह कई जिंदगियों को बचाने के लिए जुट गए। बिना कोई सुरक्षा उपकरण और जान की परवाह किए बिना लोग मलबा हटाते नजर आए। लोगों में जज्बा ऐसा था कि पुलिस कर्मियों के पहुंचने के बाद भी वह बचाव कार्य में जुटे रहे।
दमकल विभाग को भी वह अंदर जाने नहीं दे रहे थे। मौके पर लोगों का कहना था कि दमकल विभाग लोगों को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं निकाल पाएगा। लेकिन, कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस और दमकल कर्मियों ने स्थानीय लोगों को हटाया। इसके बाद तेजी से बचाव कार्य शुरू किया गया। दिन भर पूरा इलाका इमारत गिरने की घटना से सहमा रहा।
चार की मौत, 14 घायल
मध्य दिल्ली के करोल बाग इलाके के बापा नगर में बुधवार सुबह एक चार मंजिला इमारत भर भरा कर गिर गई। हादसे में एक किशोर समेत चार की मौत हुई है। जबकि घायल 14 लोगों का लेडी हॉर्डिंग समेत दूसरे अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मृतकों की पहचान अमन (12 वर्ष), मुकीम (25 वर्ष), मुजीब (18 वर्ष), मोसिन (26 वर्ष) के रूप में हुई है। 25 गज की इमारत की हर मंजिल पर महिलाओं के जूते-चप्पल बनाने की फैक्टरी चल रही थी। इमारत 30 से अधिक वर्ष पुरानी थी और वह काफी जर्जर हालत में थी।