दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा कोहिनूर हीरे को लेकर एक पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि वे कोहीनूर पर अपना दावा करे। मिश्रा ने अपने पत्र में कहा कि अदालत ने भी सरकार से इस मामले में पुर्नविचार करने को कहा है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय में केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिया गया शपथ पत्र न केवल कोहिनूर हीरे से जुड़ी देश की भावना के विपरीत है, बल्कि तथ्यहीन भी है।
इससे भारत के इतिहास की समझ रखने वाले लोग भी हैरान है कि आखिर क्या वजह है कि अचानक केंद्र सरकार इस बहुमूल्य हीरे पर से देश का हक खत्म करने की जल्दबाजी में है।
सरकार के लिए ये बड़ी शर्मनाक बात है। एक ऐतिहासिक धरोहर व राष्ट्रीय पहचान के मुद्दे पर सरकार को यहीं नहीं मालूम की उसकी नीति क्या है?
देश की विरासत व इतिहास के साथ यह धोखा है। किसी भी स्वाभिमानी देश के लोगो को यह मंजूर नहीं होगा। क्योंकि अब पाकिस्तान भी इस पर अपना हक जता रहा है।