उनकी मौत के बाद परिवार से उनका अंगदान करने का फैसला लिया। राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के नियम के तहत उनके लिवर को आईएलबीएस अस्पताल, दिल्ली को आवंटित किया गया था। जबकि एक किडनी एम्स दिल्ली को और दूसरी किडनी सफदरजंग अस्पताल को आवंटित की गई। महिला की कॉर्निया और हृदय वाल्व को एम्स, नई दिल्ली में सुरक्षित रखा गया है।
इस मौके पर एम्स ओआरबीओ की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. आरती विज ने कहा कि किसी परिवार के लिए उनका अपने को खोना कठिन समय होता है। लेकिन परिवार से साहस दिखाते हुए दूसरों को जिंदगी देने का फैसला लिया। परिवार की सहमति के बाद ओआरबीओ टीम, चिकित्सकों, न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट, प्रत्यारोपण टीम, प्रत्यारोपण परामर्शदाताओं और समन्वयकों, तकनीशियनों, प्रशासकों, फोरेंसिक और पुलिस विभागों के सहयोगात्मक प्रयासों से अंगदान करवाया गया।