उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने बुधवार को बाबा रामदेव के मामले में इंटरनेट और सोशल मीडिया दिग्गजों, फेसबुक, ट्विटर और गूगल की याचिकाओं पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। याचिका में बाबा रामदेव के खिलाफ मानहानि के आरोपों वाले वीडियो के लिंक को वैश्विक आधार पर हटाने, ब्लॉक या अक्षम करने के आदेश को चुनौती दी गई है।
यह मामला न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति सांघी ने याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें 21 मार्च को एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसके वह सदस्य नहीं हैं। फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश के 23 अक्तूबर, 2019 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की सहायक कंपनी यूटयूब को रामदेव के खिलाफ मानहानि के आरोपों वाले वीडियो के लिंक को वैश्विक आधार पर हटाने, ब्लॉक या अक्षम करने का निर्देश दिया गया है।
एकल न्यायाधीश ने माना था कि केवल जियो-ब्लॉकिंग या भारत के दर्शकों के लिए अपमानजनक सामग्री तक पहुंच को अक्षम करना, जैसा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा सहमति व्यक्त की गई है पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने कहा था कि यहां रहने वाले उपयोगकर्ता अन्य माध्यमों से उस तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं।