हरियाणा में पांच जून से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन जाट आरक्षण आंदोलन ने उत्तर प्रदेश के बाद राजधानी में भी दस्तक दे दी है। नजफगढ़ में जाट समाज के लोगों ने मंगलवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति दिल्ली प्रदेश के बैनर तले आरक्षण की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया।
उन्होंने अपनी मांग के संबंध में इलाके के थानाध्यक्ष को ज्ञापन दिया। नजफगढ़ में जाटों ने अपनी मांगों ने बहादुरगढ़ रोड स्थित जाट भवन के समक्ष धरना प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व चौ. जयवीर गुलिया ने किया।
इस मौके पर समिति के प्रदेश अध्यक्ष आजाद सिंह लाकड़ा ने कहा कि हरियाणा में आज लोकतंत्र नाम की चीज नहीं रही है। राज्य सरकार अंग्रेजी हुकूमत से भी अधिक अत्याचार करने पर उतारू है, जिसे हरियाणा के जाटों के साथ-साथ पूरे देश के जाट इस अत्याचार को सहन नहीं करेगा।
प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता रोहताश हुड्डा ने आरोप लगाया कि हरियाणा में आज सामान्य नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। प्रजातंत्र में किसी को भी अपनी बात कहने का हक है, लेकिन जब कोई भी सामाजिक संगठन अपनी बात कहने के लिए बैठक का आयोजन करता है तो उन पर देशद्रोह के मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। हरियाणा सरकार जाट समाज को दंगे करने के लिए उकसा रही है।
उधर जाटों के धरने के चलते जाट भवन के समक्ष बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात था। पुलिस ने भवन के बाहर धारा 144 लगा दी थी। इसके चलते जाट भवन के बाहर नहीं निकल सके और उन्होंने भवन परिसर में ही विरोध प्रदर्शन किया।
इस विरोध प्रर्दशन में जाटों के अलावा अन्य बिरादरी के लोगों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शन में सतीश सोलंकी, ओमप्रकाश अग्रवाल, खजान सिंह, जसबीर शौकीन, यशवंत दहिया, विरेन्द्र डागर, मांगेराम राठी, हरीश सहरामवत, विजय मान आदि उपस्थित थे।