यौन हिंंसा की घिनौनी वारदात की शिकार हुई नर्स अरुणा शानबाग के जीवन की त्रासदी को एक पीएचडी स्कॉलर ने कलमबद्ध किया है। तेजी से बदलते समाज में अरुणा ने तकरीबन 42 वर्षों तक ठहरी हुई जिंदगी जी।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में पीएचडी कर रहीं स्वाती शर्मा ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सुषमा सूरी के निर्देशन में अरुणा के जीवन के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करने की कोशिश की है।
स्वाती ने अपने इस अध्ययन के लिए पत्रकार पिंकी विरानी की पुस्तक अरुणा स्टोरी का सहारा लिया। अरुणा की दोस्त पिंकी ने ही उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु की याचिका दायर की थी। लंबी बहस के बाद हालांकि अदालत ने याचिका अस्वीकार कर दी थी।