दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सौरभ भारद्वाज की देखरेख में माइक्रो समर एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है, मगर इससे पहले जल बोर्ड ने वाटर डाटा बैंक तैयार किया है। इस दौरान समस्त विधानसभा क्षेत्रों के इलाकों में पानी की स्थिति के बारे में ब्यौरा एकत्रित किया गया है। दरअसल कई विधानसभा क्षेत्रों के कई इलाकों में मांग से अधिक पानी की आपूर्ति हो रही है, जबकि कुछ इलाकों में मांग की तुलना में कम पानी पहुंच रहा है और इन इलाकों में लोगों की पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।
इसके मद्देनजर जल बोर्ड ने इन इलाकों में गर्मियों में जल आपूर्ति में सुधार करने का निर्णय लिया है। जल बोर्ड ने गर्मी के मौसम में पेयजल संकट की चपेट में आने वाले इलाकों में बेहतर पेयजल आपूर्ति करने के लिए अभी से कदम उठाने का निर्णय लिया है। बोर्ड की कोशिश है कि गर्मी से पहले पेयजल पहुंचाने में आने वाली सभी खामिया दूर करने के साथ-साथ आवश्यक कदम पहले ही उठा लिए जाए। जल बोर्ड ने विधायकों से पानी की मांग और जलापूर्ति के लिए अतिरिक्त जानकारियां और सुझाव भी मांगे है।
पानी की मांग व आपूर्ति में 150 एमजीडी का अंतर
राजधानी में पेयजल की मांग व आपूर्ति में काफी बड़ा अंतर है। इस संबंध में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी चिंता जता चुके है और उन्होंने पानी की मांग व अंतर दूर करने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त पानी की मांग की थी। राजधानी में प्रतिदिन करीब 1140 एमजीडी पानी की मांग है, जबकि तमाम स्रोतों से मिले रहे पानी में से साफ करने के बाद जल बोर्ड 990 एमजीडी की आपूर्ति करता है। इस तरह पानी की मांग व आपूर्ति में करीब 150 एमजीडी का अंतर है।
इन विधानसभा क्षेत्रों में पानी की होती है दिक्कत
नरेला, बवाना, मुंडका, किराड़ी, नजफगढ़, मटियाला, बिजवासन, पालम, द्वारका, उत्तम नगर, विकासपुरी, बुराड़ी, तिमारपुर, आदर्श नगर, छतरपुर, अंबेडकर नगर, संगम विहार, तुगलकाबाद, ओखला, महरौली, देवली, शालीमार बाग, मोतीनगर, मादीपुर, शकूरबस्ती, त्रिलोकपुरी, कोंडली, पटपड़गंज, कृष्णा नगर, सीमापुरी, सीलमपुर, बाबरपुर, गोकलपुरी, मुस्तफाबाद आदि।