नई दिल्ली। बिनोदिनी की कहानी को प्रेम, विश्वासघात, पितृसत्ता और सामाजिक संघर्ष के जाने-पहचाने दायरे में समेटने के बजाय उसके जीवन की अनछुई परतों को सामने लाने का प्रयास नाटक सेई एक बिनोदिनी में दिखा। एलटीजी सभागार में नाट्यरंग समूह की ओर से इस नाटक को प्रस्तुत किया गया।
सुरजित बनर्जी की लिखित और अनिंदिता बनर्जी की निर्देशित नाटक में कहानी को किस्सों, संदर्भों और समय के बदलाव के जरिए आगे बढ़ाया गया। इसमें इतिहास के भूले-बिसरे प्रसंगों और राजनीति के कम चर्चित पहलुओं को भी जगह मिली। बिनोदिनी की भूमिका में अनिंदिता बनर्जी ने प्रभावी अभिनय किया। तारासुंदरी समेत विभिन्न भूमिकाओं में देबप्रिया बनर्जी ने अलग छाप छोड़ी। सुरजित बनर्जी का अभिनय भी दर्शकों का ध्यान खींचने वाला रहा। चालनतिका गांगोपाध्याय ने क्षेत्रमोनी की भूमिका निभाने के साथ गायन भी किया। कोंकणा बसक ने माला और सायंतन रॉय चौधरी ने निर्देशक गणेश का किरदार निभाया। नाट्यरंग समूह के अध्यक्ष और मुख्य निर्देशक स्वपन सेनगुप्ता हैं। संवाद