नगीना के तब्लीग के जरिए दुनिया में शांति का पैगाम देने वाले मेवात की पहचान गोपालन से भी होती रही है। भले ही यहां दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले गोशालाएं कम हैं लेकिन गोधन पालने वालों की तादाद बड़ी है। जुम्मा की नमाज के बाद मेवात इस्लामिक सेंटर ने गोधन को नुकसान पहुंचाने वालों पर एक लाख रुपये दंड करने का फरमान सुनाया है।
वहीं इन गतिविधियों में शामिल लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। गत दिवस नूहं में हुई महापंचायत ने गोतस्करी एवं गोकशी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए न केवल इसे सामाजिक बुराई माना है बल्कि ऐसे लोगों की खिलाफत करने का फैसला सुनाया था।
मौलाना हकीमुद्दीन सनाबली ने बातचीत में बताया कि शुक्त्रस्वार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है जिसमें गोतस्करी करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। यह उन लोगों पर भी लागू होगा जो गोकशी व गोतस्करी करने वालों को शरण देते हैं। उन्होंने बताया कि मेवात क्षेत्र के लोग पशुपालन पर आधारित हैं। ऐसा कोई गांव नहीं मिलेगा जहां गाय नहीं पाली जाती है।
मेवात वही क्षेत्र है जहां बेटियों को शादी के बाद दान में गाय देने की तहजीब है। झिमरावट गांव के रायभान नंबरदार अपनी बेटियों को गोधन दान दे चुके हैं, उन्हें भी गाय दान मिली थी। इसी गांव के कंवर खां ने अपने बेटे हसन मोहम्मद की शादी में दहेज का त्याग करते हुए केवल गाय दान में ली थी।
घागस गांव के सोहराब नंबरदार ने अपनी इकलौती बेटी को दो गाय दान में दी थी। ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जब मेवातियों ने दूसरे मजहब के लोगों को भी गोधन दान किया है।