पुलिस अधिकारी ने बताया कि आठ अगस्त को सेल को सूचना मिली थी कि इनामी आतंकी रिजवान अली गंगा बक्श मार्ग स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क के पास आने वाला है। एसीपी ललित मोहन नेगी के नेतृत्व में सेल की टीम ने रात 11 बजे वहां घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। स्पेशल सेल ने इस बाबत एक मामला दर्ज किया है। सेल रिजवान से इस मॉड्यूल में शामिल अन्य आतंकियों के बारे में पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिजवान अली से फिलहाल स्पेशल सेल गहन पूछताछ कर रही है। उसके बाद उसे एनआईए को सौंप दिया जाएगा।
पिछले साल आईईडी बनाकर टेस्टिंग की थी
अधिकारिक सूत्रों का कहना है शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि रिजवान समेत पुणे मॉड्यूल के इसके सहयोगी आतंकियों ने पिछले साल दिल्ली के कई जगहों पर जंगल में आईईडी बनाकर उसकी टेस्टिंग की थी। हालांकि, इसको उस वक्त इसमें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद यह पुणे भाग गया था।
आईएसआई के निर्देश पर लश्कर-ए-तैयबा ने की थी भर्ती
रिजवान ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस माॅड्यूल के आतंकियों की आईएसआईएस के लिए काम करने की बात कहकर इनकी ऑनलाइन भर्ती की थी। इस मॉड्यूल के सात आतंकियों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है। उसने बताया कि हैदराबाद के कुरमागुडा का रहने वाला फरहतुल्ला गौरी पिछले कई साल ने पाकिस्तान में छिपा है। लश्कर ने उसे अपना हैंडलर बनाया है। हैंडलर फरहतुल्ला गौरी व शाहिद फैसल ने आईएसआई के निर्देश पर आईएसआईएस के लिए पुणे मॉड्यूल की ऑनलाइन भर्ती की थी। ऐसा इसलिए किया था ताकि आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की जगह आईएसआईएस का नाम सामने आए।
भर्ती होने के बाद मॉड्यूल ने पहले पुणे में ठिकाना बनाया
अभी तक की जांच में पता चला है कि भर्ती होने के बाद इस मॉड्यूल ने पहले पुणे में अपना ठिकाना बनाया। आतंकियों ने वहां दूसरे की प्रॉपर्टी पर कब्जा कर उसे बेचकर पैसे जमा किए। फिर उन पैसों का इस्तेमाल जेहाद के लिए किया। आतंकियों ने वाहन चोरी कर आपराधिक वारदात करना शुरू किया। करीब डेढ़ साल पहले पुणे पुलिस ने चोरी के वाहन के साथ इमरान व युनूस साकी को गिरफ्तार कर लिया था जबकि रिजवान अली वहां से फरार हो गया। उसके बाद से वह फरार था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुणे एटीएस के इनपुट पर स्पेशल सेल ने पिछले साल अक्तूबर में पुणे मॉड्यूल के तीन आतंकियों मोहम्मद शाहनवाज को जैतपुर, मोहम्मद रिजवान अशरफ को लखनऊ व मोहम्मद अरशद वारसी को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया था। एनआईए ने शाहनवाज पर तीन लाख का इनाम घोषित किया था। 2018 में तीनों जामिया नगर में एक साथ रहे थे तभी से तीनों एक दूसरे को जानते थे। रिजवान अली उस दौरान शाहनवाज की बहन, पत्नी व अपनी पत्नी को लेकर दिल्ली से भागने में कामयाब हो गया था।