सराय काले खां स्टेशन अंतरराज्यीय बस अड्डा, रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन से जुड़ता है। वीर हकीकत राय आईएसबीटी और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन को एफओबी के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। जबकि आरआरटीएस स्टेशन के पास एक प्रवेश द्वार के माध्यम से दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन से जाेड़ा गया है। इसके अलावा सिटी बस इंटरचेंज सुविधाएं और रिंग रोड एंट्री पॉइंट भी बनाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आरआरटीएस, आईएसबीटी, सिटी बस टर्मिनल, मेट्रो और ऑटो टैक्सी पार्किंग के बीच प्रभावी इंटरचेंज सुनिश्चित करने और वाहन उतारने की सुविधा के लिए केंद्रीय इंटरचेंज प्लाजा का भी प्रस्ताव है।
98 प्रतिशत काम पूरा
82 किमी लंबा आरआरटीएस कॉरिडोर 80 किमी यानी करीब 98% तक बन गया है। केवल दो किमी का वायाडक्ट निर्माणाधीन है। कॉरिडोर पर ट्रैक बिछाने का कार्य भी साथ-साथ चल रहा है। एक बार ट्रेन शुरू हो जाने पर दिल्ली से मेरठ की दूरी 60 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाएगी। दिल्ली में आरआरटीएस कॉरिडोर की लंबाई 14 किमी है, जिसमें नौ किमी का एलिवेटेड जबकि पांच किमी का भूमिगत स्ट्रेच है। दिल्ली सेक्शन में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार आरआरटीएस स्टेशन शामिल हैं, जिनका निर्माण अंतिम चरण में है। मौजूदा समय में गाजियाबाद में साहिबाबाद से मोदी नगर नॉर्थ तक आठ स्टेशन, साहिबाबाद, गाजियाबाद, डीपीएस राजनगर गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुराद नगर, मोदी नगर साउथ और मोदी नगर नॉर्थ पर 34 किमी के सेक्शन में नमो भारत ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है।
आरआरटीएस के भूमिगत स्टेशनों पर मिलेगी ताजी हवा
आरआरटीएस कॉरिडोर पर बनाए जा रहे भूमिगत स्टेशनों में एनवायरमेंट कंट्रोल सिस्टम (ईसीएस) लगाया जा रहा है। यह सिस्टम भूमिगत स्टेशनों में निरंतर ताजी हवा, कूलिंग और वेंटिलेशन आवश्यकताओं को विनियमित करके अनुकूलित तापमान सुनिश्चित करेगा। यह ईसीएस दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के सभी चार भूमिगत स्टेशनों, दिल्ली में आनंद विहार और मेरठ में मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल में लगाया जा रहा है। यह सभी स्टेशन जमीन से 8 से 23 मीटर की गहराई पर बनाए जा रहे हैं। भूमिगत स्टेशनों में एलिवेटेड स्टेशनों की तुलना में सीमित वायु प्रवाह होता है। इन स्टेशनों में हवा की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने के लिए इस सिस्टम को बनाया जा रहा है।