जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा में आरोपी बनाए जाने पर छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष का कहना है कि कन्हैया के बाद अब मुझे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हमारे पास भी सबूत हैं, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई तक नहीं की।
केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा सचित अमित खरे के साथ विवाद सुलझाने पर शुक्रवार को हुई बैठक के बाद बाहर निकलते ही छात्रसंघ अध्यक्ष को आरोपी बनाए जाने की सूचना मिली। मंत्रालय में ही आईशी घोष ने कहा कि हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेने के लिए छात्र बीते 76 दिन से शांतिपूर्वक व लोकतांत्रिक ढंग से विरोध कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने छात्रसंघ के पदाधिकारियों व छात्र संगठनों को जेएनयू हिंसा का आरोपी बना दिया। पुलिस अपना काम ढंग से की होती तो रिपोर्ट अलग बनती। कैंपस के अंदर नकाबपोश भीड़ ने मुझ पर हमला किया। हमारे पास भी सबूत हैं कि नकाबपोश भीड़ के गुंडे कौन थे? हमने कुछ गलत नहीं किया, इसलिए डर भी नहीं लगता। हमले की सूचना के बाद भी पुलिस कैंपस में नहीं पहुंची। इसका जवाब अधिकारियों को देना होगा।
दिल्ली पुलिस हमें फ्रेम करने की कोशिश में लगी है: साकेत मून
छात्रसंघ उपाध्यक्ष साकेत मून का आरोप है कि दिल्ली पुलिस हमें फ्रेम करने की कोशिश कर रही है। हमले वाले दिन दिल्ली पुलिस गेट और कैंपस में खड़े होकर तमाशा देख रही थी। कुलपति ने हिंसा करवाई और हमें फंसाया है। हाईकोर्ट ने दो बार कुलपति को कहा कि वे छात्रों से मिलें, लेकिन दोनों बार अदालत के आदेश की अवमानना की गई। दिल्ली पुलिस को हमारे खिलाफ सीधे गृहमंत्रालय से आदेश दिए जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने विकास पटेल को नहीं पहचाना: बालाजी
छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन साईं बालाजी का कहना है दिल्ली पुलिस हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर पिछले 76 दिनों से विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज करने के मामले में पहचान लिया। पुलिस को स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया व स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम याद है लेकिन एबीवीपी का नहीं। पुलिस को हाथ में डंडा लेकर चलने वाले विकास पटेल का चेहरा तक पता नहीं है। पुलिस ने जांच के नाम मजाक किया है।
विवाद सुलझाने के लिए बैठक की तो पुलिस ने आरोपी बना दिया: यादव
जेएनयू विवाद सुलझाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव बैठक बातचीत करते हैं। उधर, दिल्ली पुलिस वामपंथी संगठनों के छात्रों को कठघरे में खड़ी कर देती है। पुलिस ने जिन छात्रों व उनसे जुड़े संगठनों के नाम सार्वजनिक किए हैं, वे आम छात्रों की दिक्कतों के लिए 76 दिन से विरोध दर्ज कर रहे हैं। एबीवीपी का नाम तक नहीं लिया गया।