फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : इनका हौसला समाज को देगा नई दिशा, प्रेरणा से लिखी जा सकती है कामयाबी की इबारत

Mon, 07 Mar 2022 03:59 AM IST
सुशील कुमार आदित्य पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला ने कामकाज की वजह से समाज में बेहतर स्थान रखने वाली सशक्त महिलाओं से बातचीत की, जिनसे दूसरी महिलाएं प्रेरणा ले सकती हैं।
विज्ञापन
उषा रंगनानी, शोभा गुप्ता, बीबी रंजीत कौर और प्रीति सांगवान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शास्त्रों में लिखा है 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:, यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफला: क्रिया' इस श्लोक का अर्थ है कि जहां स्त्रियों का सम्मान होगा, वहां देवी-देवता निवास करते हैं। जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां अनेक जतन करने के बावजूद किसी काम का शुभ फल नहीं मिलता। इन लाइनों का मूल ये है कि भारतीय समाज में प्राचीन काल से ही स्त्रियों का स्थान ऊपर रहा है। बीच के कुछ दशकों में महिलाओं के मनोबल को कुचलने की कोशिश की गई। 

विज्ञापन


हमारे समाज को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। लेकिन लोगों को जल्द ही यह बात समझ में आ गई कि आधी आबादी को दबाकर नहीं रखा जा सकता। अब फिर महिलाओं को पुरुषों जैसे समान अवसर मिले, तो वो विभिन्न क्षेत्रों में परचम लहरा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला ने कामकाज की वजह से समाज में बेहतर स्थान रखने वाली सशक्त महिलाओं से बातचीत की, जिनसे दूसरी महिलाएं प्रेरणा ले सकती हैं।

बीबी रंजीत कौर 
नारी सशक्तीकरण के लिए बीबी रंजीत कौर विशेष तौर से कार्य कर रही हैं। वह स्कूलों, कॉलेजों में जाकर लड़कियों को समाज के प्रत्येक क्षेत्र में चुनौतियां स्वीकारने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अपने जीवन के करीब 35 साल उन्होंने इस काम में खपा दिए। तिलक नगर की संतगढ़ कॉलोनी में 1965 में जन्मीं रंजीत कौर ने 1986 में डीयू से बीकॉम व 1988 में जामिया मिल्लिया से इकोनॉमिक्स से एमए किया। 2021 तक हरकिशन पब्लिक स्कूल में बच्चों को इकोनॉमिक्स पढ़ाया। साथ में सामाजिक व राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाईं। स्नातक की पढ़ाई के दौरान 1984-85 में वह भारती महिला कॉलेज छात्र संगठन की सचिव चुनी गईं और 1985-86 में अध्यक्ष बनीं। इसके बाद महिलाओं, समाज में गरीब, पिछड़े, दलित समाज व जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए निरंतर काम किया। लंबे समय तक दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की उपाध्यक्ष, शिरोमणि अकाली दल महिला विंग की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष रहीं। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी महिला सहयोगियों के साथ लोगों की मदद की। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दिल्ली पुलिस, कई स्कूलों, कॉलेजों के साथ मिलकर वह महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं। 
विज्ञापन


शोभा गुप्ता 
शोभा गुप्ता राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण राजनीति परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन उनकी पहचान अपने काम की बदौलत बनी है। वह मानती हैं कि भारत में साल भर महिला दिवस होता है, लेरिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भी महत्वपूर्ण है। कोविड-19 महामारी काल में शोभा गुप्ता ने सैकड़ों महिलाओं को रोजगार प्रदान कराया। अपनी सामाजिक संस्था संपूर्णा के साथ उत्तरी दिल्ली की सैकड़ों महिलाओं को एकजुट किया और उन्हें उनके घर पर ही कपड़े के मास्क बनाने का काम सौंपा। कपड़े के थैले भी बनवाए। एक मास्क बनाने के बदले उन्हें पांच रुपये दिए। इस दौरान करीब 10 लाख मास्क बनाए गए और देशभर में बांटे गए। इस काम में उन्हें स्थानीय जन प्रतिनिधियों का सहयोग मिला। शोभा गुप्ता सामाजिक कार्य में परास्नातक और एमफिल, पीएचडी हैं। 1993 से इस काम में लगी हैं। 2012 में दिल्ली में निर्भया मामले के बाद उन्होंने वालंटियर सेवा शुरू की और लड़कियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया। तीन हजार वालंटियर बनाकर उन्होंने निगम स्कूलों में आदर्श शौचालय के लिए कार्यक्रम कराए। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देशभर में ग्राउंड लेबल पर काम कर रहीं 15 महिलाओं को उनकी संस्था सम्मानित करेगी।

उषा रंगनानी
महिलाओं के मनोभावों को महिलाएं बेहतर समझती हैं। उत्तर-पश्चिम दिल्ली की पुलिस उपायुक्त उषा रंगनानी ने अपनी इस सोच को ऊपर रखा है और जिले में महिलाओं के लिए असुरक्षित 65-70 बीट्स के लिए तेजस्विनी स्कीम शुरू की है। इन बीट्स पर महिला सिपाहियों को तैनात किया है, जो महिलाओं के साथ अपराध होने की स्थिति में उनके घर जाकर उनसे संपर्क करती हैं। उनके इस कदम से महिलाएं अपने साथ होने वाले अपराध के खिलाफ खुलकर पुलिस में शिकायत दर्ज करा रही हैं। उषा रंगनानी आगरा में जन्मीं और पढ़ाई-लिखाई भी वहीं से पूरी की। साल 2011 में उन्होंने आईपीएस ज्वाइन किया और ज्यादातर सेवाएं दिल्ली में दी हैं। कुछ समय वह अंडमान में एसपी रही और अक्तूबर 2020 में उन्हें फिर दिल्ली में नार्थ वेस्ट जिले की कमान संभालने का जिम्मा मिला। उन्होंने बताया कि जबतक देश की आधी आबादी सुरक्षित नहीं होगी, देश सुरक्षित नहीं होगा। अब उन्होंने महिलाओं और बेटियों को जागरूक करने के लिए अपनी तेजस्विनी मुहिम को एक पायदान और बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने मार्च महीने में तेजस्विनी और परिवर्तन टीम के सहयोग से करीब 2000 महिलाओं और बच्चियों को विभिन्न अपराधों, खासकर साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम शुरू किया है। जिले के स्कूलों-कॉलेजों में बच्चियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

प्रीति सांगवान
दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन डी-24, जिसका काम खतरनाक गैंगस्टर काला जठेड़ी और उसकी सहयोगी अनुराधा को पकड़ना था, दिल्ली पुलिस ने इसके लिए 20 टीमों का गठन किया, जिसकी हर टीम में पुरुषों का वर्चस्व था, जिसमें केवल दो महिलाओं को शामिल किया गया, उनमें एक दिल्ली की धाकड़ कॉप प्रीति सांगवान हैं। काला जठेड़ी को पकड़ने के लिए टीम को करीब 40 किलोमीटर का क्षेत्र सौंपा गया। प्रीति के हिस्से देहरादून और हरिद्वार का इलाका आया। तलाश करते प्रीति एक अपार्टमेंट के सामने पहुंचीं, जहां उन्हें पता चला काला जठेड़ी और उसकी सहयोगी अनुराधा इसी अपार्टमेंट में छुपे हैं। यहां उन अपराधियों की कार भी मिल गई। इसके बाद प्रीति ने अपनी वेश-भूषा बदली और एक स्थानीय महिला के रूप में वहीं अपराधियों का घंटों तक इंतजार किया। तभी प्रीति ने काला जठेड़ी और अनुराधा को अपार्टमेंट से बाहर आते देखा। इसके बाद अपराधियों की पुष्टि की और अनुराधा को पीछे से कसकर पकड़ लिया और कहा, यू आर अंडर अरेस्ट। प्रीति सांगवान ने 2018 में दिल्ली पुलिस ज्वाइन किया और वह कम समय में स्पेशल सेल का हिस्सा बन गईं और एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन डी-24 को अंजाम तक पहुंचा दिया। प्रीति का जन्म हरियाणा के चरखी दादरी में हुआ, जहां लड़कियों के लिए स्कूल जाना बड़ी चुनौती थी। लेकिन प्रीति ने आगे बढ़ने की ठानी, उन्होंने कॉमर्स में स्नातक और कंप्यूटर में परास्नातक किया। फिर दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनीं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दिल्ली पुलिस ने अपनी पॉड कास्ट सेवा 'किस्सा खाकी का' प्रीति सांगवान पर आयोजित की।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें