हाईकोर्ट ने दोनों को नौकरी की संभावनाएं तलाशने को कहा
ट्रायल कोर्ट की ओर से मामले में दो लोगों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) को एसिड अटैक के दो पीड़ितों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार के किसी भी विभाग में नौकरी के लिए प्रस्ताव या संभावनाएं बनाने को कहा है।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने डीएसएलएसए को दो सप्ताह के भीतर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में 2009 में एसिड अटैक का सामना करने वाले पीड़ितों की नए सिरे से चिकित्सा जांच कराने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने 2012 में धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट की ओर से मामले में दो लोगों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है।
अभियोजन पक्ष के साथ-साथ पीड़ितों द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में सक्षम नहीं है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि यदि पीड़ितों पर तेजाब फेंकने के अपराध में हमलावर की पहचान स्थापित नहीं की गई है, तो अदालत इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती है कि पीड़ितों को गंभीर चोटें आई हैं।
अदालत ने यह देखते हुए कि हमले में पीड़ितो का चेहरा और शरीर का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह विकृत हो गया और आंखों की रोशनी भी चली गई। तदनुसार, दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को महिला पीड़ित मुआवजा निधि के तहत प्रत्येक पीड़ित को 5,00,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश देते हैं, जिसे इस न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सावधि जमा रसीदों में रखा जाएगा। एक राष्ट्रीयकृत बैंक में और उस पर अर्जित त्रैमासिक ब्याज पीड़ितों के बचत बैंक खाते में भेज दिया जाएगा, जिसे वे अपने खर्च के लिए निकालने के लिए स्वतंत्र होंगे।