आरटीआई कार्यकर्ता को समय पर जवाब न देने और आवेदन को गलत ठहराने वाले सहायक जनसूचना अधिकारी एवं नगराधीश पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यह आदेश राज्य सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए दिया है। लापरवाही का आलम यह है कि आवेदनकर्ता को आठ महीने तक जवाब भी नहीं दिया गया।
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सिटीजन वाइस एसोसिएशन के महासचिव रवींद्र चावला ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए यौन उत्पीड़न रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम के तहत शिकायत समितियों के गठन के बारे में उपायुक्त कार्यालय से जानकारी मांगी थी।
आयुक्त कार्यालय ने उनके आवेदन को सिविल सर्जन के पास भेज दिया। बताया जाता है कि सहायक जनसूचना अधिकारी नगराधीश ने आठ महीने में भी आवेदनकर्ता को जवाब नहीं दिला पाए। यही नहीं उन्होंने आवेदन को ही गलत करार दे दिया।
इस पर चावला ने राज्य सूचना आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त उर्वशी गुलाटी ने शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के लिए नगराधीश पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।