देश को पहला और हरियाणा को छटा शिक्षा मंत्री देने वाला मेवात इलाका आज भी शिक्षा के क्षेत्र में देश का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता है।
भले ही देश आज शिक्षा दिवस मना रहा है लेकिन मेवात में तो शिक्षक हैं ही नहीं, जिनके साथ मिलकर बच्चे शिक्षक दिवस मनाएं। मुस्लिम छात्राओं की स्थिति तो यहां सबसे अधिक खराब है।
मेवात जिले की साक्षरता दर जहां 56 फीसदी है वहीं मुस्लिम पुरुष 27 और ग्रामीण महिला मात्र पांच फीसदी ही साक्षर हैं जबकि रोहतक में लिटरेसी रेट 80.4, सोनीपत में 80.8, हिसार में 73.2, कुरुक्षेत्र में 76.7, फरीदाबाद में 83 और गुड़गांव में 84.4 फीसदी है।
इसका मुख्य कारण यह है कि मेवात में उच्च शिक्षा संस्थान न होने की वजह से लड़कियां पांचवीं और लड़के दसवीं, बारहवीं के बाद पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।
जिले में 70 फीसदी मुस्लिम लड़कियां पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। बची छात्राओं में से 90 फीसदी आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। इसके बाद बची 95 फीसदी मुस्लिम लड़कियां दसवीं के बाद और अन्य बची में से 99 फीसदी लड़कियां बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं।
मेवात में पढ़ाई छोड़ने एक बड़ा कारण यह है कि मुस्लिम समाज के लोग पांचवीं के बाद अपनी लड़कियों को पुरुष अध्यापकों से पढ़वाना नहीं चाहते और गांव से दूर के स्कूलों में भेजने से परहेज करते हैं।
एक बड़ा कारण यह भी है कि मेवात जिले में करीब 50 फीसदी अध्यापकों की कमी है। मुस्लिम समाज के अधिकतर लोग अपनी लड़कियों को दुनियावी तालीम की बजाय दीनी तालीम को ज्यादा तवज्जो देते हैं।
हाफिज आमीन शाह चौखा का कहना है कि मुस्लिम समाज के लोग अपनी लड़कियों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी तालीम भी दिलाना चाहते हैं लेकिन सरकार ही नहीं चाहती कि मेवात की बेटियां बढ़ें। उन्होंने बताया कि उनके गांव शाह चौखा में गर्ल्स हाईस्कूल है लेकिन स्कूल में दाखिल करीब 600 लड़कियों को पढ़ाने के लिये एक भी अध्यापक सरकार ने नियुक्त नहीं किया है।
उन्होंने बताया तालीम के बारे में इस्लाम धर्म के संस्थापक मोहम्मद साहब ने जोर दिया था। उन्होंने लड़के और लड़कियों को बराबर की तालीम का आदेश दिया था वहीं पवित्र कुरान शरीफ में भी इक्रा यानी पढ़ो शब्द आया है जो तालीम का हुक्म देता है।
वहीं समाजसेवी रमजान चौधरी, हमारे अधिकार मोर्चा के जफरूदीन और अशफाक आलम का कहना है कि मेवात की लड़कियों और लड़कों को पढ़ाने के लिये किसी भी सरकार की नियत साफ नहीं रही। आज भी मेवात में करीब तीन हजार अध्यापकों की कमी है। सैकड़ों स्कूल बिना अध्यापकों के चल रहे हैं। मेवात के लिये शिक्षा का कैडर अलग से बना हुआ है लेकिन इस कैडर में कभी भर्ती ही नहीं हुई है।
आप को बता दें कि वर्ष 1952 में देश के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में मौलाना अबुल कलाम आजाद को मेवात ने ही दिया था। वह दस साल तक देश के शिक्षा मंत्री रहे। वहीं मेवात ने हरियाणा सरकार को वित्त, कृषि, गृहमंत्रियों समेत कुल छह मंत्री दिए हैं। इनमें ही 1988 में चौधरी खुर्शीद अहमद प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने। बावजूद इसके मेवात का इलाका आज शिक्षा के क्षेत्र में सबसे फिसड्डी है।