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दो साल में ‘चार पग’ भी नहीं चली मोदी सरकार, लटके भ्रष्टाचार मिटाने वाले कई विधेयक

Wed, 25 May 2016 03:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सरकार के दो साल पूरे होने पर सिविल सोसायटी ने जारी की रिपोर्ट
  • कहा, भ्रष्टाचार मिटाने संबंधी विधेयक पर सरकार की कछुआ चाल
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- फोटो : Getty
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विस्तार
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दो साल में मोदी सरकार ने सिस्टम को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का वादा नहीं निभाया है। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अहम चार विधेयक अब तक संसद में लटके हैं या पटल पर रखे जाने के इंतजार में हैं।
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इनमें व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट, लोकपाल-लोकायुक्त एक्ट, शिकायत निवारण बिल और भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन बिल शामिल हैं। देश भर के सामाजिक संगठनों के समूह सिविल सोसायटी ने मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर ‘वादा न तोड़ो अभियान’ रिपोर्ट जारी कर इन मुद्दों को उठाया है।

लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट जनवरी 2014 में पास हो गया था। एनडीए सरकार इसमें संशोधन करना चाहती है। संशोधन में नौकरशाहों के परिजनों को संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक न करने की छूट दी जाएगी। नेता प्रतिपक्ष घोषित न होने और कई लंबे-चौड़े संशोधन लाने के कारण यह एक्ट अब तक लोकसभा में लंबित है।
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वहीं व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट 2014 में पास होने के बावजूद संसद में लटका है। भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले लोगों की सुरक्षा का कानून मोदी सरकार, गलत शिकायत करने पर कार्रवाई जैसे संशोधनों के साथ लागू करना चाहती है। अभी यह बिल राज्यसभा में अटका है। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले करीब 60 लोगों की मौत हो चुकी है।

इसी तरह, घूसखोरी पर लगाम कसने के लिए 2011 में भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन बिल लाया गया था। वर्तमान एनडीए सरकार इसमें भी संशोधन चाहती है। इसके तहत अब रिश्वत देने वाला भी दोषी माना जाएगा।

इसके अलावा घूसखोरी से संबंधित मामलों की जांच के लिए लोकपाल की अनुमति जरूरी होगी। सिविल सोसायटी का मानना है कि जहां लोगों को आज भी पेंशन, राशन कार्ड बनवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, वहां ऐसा संशोधन आने पर लोगों में और भय पैदा हो जाएगा।

यही हाल, शिकायत निवारण बिल का है। 2013 में चर्चा के दौरान लगभग सभी पार्टियों के सांसदों ने इसका समर्थन किया था। लेकिन 2014 में सरकार बदलने के बाद यह बिल स्वत: ही रद्द हो गया। अब कुछ सांसद इसे फिर संसदीय पटल पर लाने में जुटे हैं।
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