सम-विषम को लेकर भाजपा ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा का कहना है कि सरकार की बहुप्रचारित सम-विषम योजना से प्रदूषण तो दूर नहीं हुआ, बल्कि इस योजना की आड़ में सरकार में बैठे लोगों ने करोड़ों रुपये का घोटाला करके अपनी जेबें भरीं।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से मांग की है कि पिछले ऑड-इवन योजना के दौरान किराये पर ली गई बसों की जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि योजना 1 जनवरी से 15 जनवरी तक चली। इस नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए।
स्कूल बंद किया गया। सरकार के अनुसार, जनता की सुविधा के लिए हजारों की तादाद में निजी बसें किराए पर ली गई, ताकि लोग सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करें।
डिपो द्वारा किराये पर ली गई बसों पर आय कम व व्यय अधिक हुआ
विश्व सांस्कृतिक महोत्सव की वजह से लगा जाम
- फोटो : अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
गुप्ता ने आरटीआई के हवाले से बताया कि नरेला डिपो व रोहिणी डिपो-2 से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों बस डिपो के प्रबंधकों ने क्रमश: 37 बसें और 21 बसें योजना के दौरान चलाने के लिए किराये पर ली थीं।
इन 58 बसों से कुल आय 13,50,795 रुपये हुई। बसों को सरकार द्वारा 15 दिनों के लिए कुल भुगतान 40,74,973 रुपये किया गया। सिर्फ इन दो डिपो द्वारा किराये पर ली गई बसों पर आय कम व व्यय अधिक हुआ। लिहाजा यह तय है कि इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये लुटाए गए।
जितनी बसें किराये पर ली गई थीं, उनमें योजना के दौरान यात्रियों को ढोने की क्षमता के 10 प्रतिशत से भी कम सवारियां बैठीं। अधिकांश बसें हरियाणा की सीमा पर निजी बस मालिकों ने ले जाकर खड़ी कर दीं और सरकार से मुफ्त में भुगतान ले लिया। यह भी आश्चर्यजनक है कि जब दिल्ली में सड़कों पर निजी कारों में से आधी कारें ही चलीं तब किराये पर ली गयी बसों में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम क्यों हो गई।