अरावली की वादियों में औद्योगिक हस्तक्षेप तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस क्षेत्र में कई तेजाब की फैक्ट्रियां चल रही हैं, जो अरावली की धरती को बंजर कर रही हैं। इन फैक्ट्रियों पर न तो वन विभाग की नजर है और न ही प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में फैक्ट्री संचालक अरावली क्षेत्र में कहीं भी तेजाब के टैंकरों को पलट देते हैं जिसके कारण गड्ढ़ों और तालाबों में तेजाब भरा रहता है। जिसके कारण वहां आए दिन जानवर तेजाब का शिकार होते रहते हैं।
पाली और भाकरी के बीच में कई लोगों ने इलेक्ट्रो प्लेटिंग का काम शुरू किया हुआ है। जिसमें लोग मार्केट से लोहे और अन्य मैटल का सामान लाकर उसे साफ करते हैं। इन सब को साफ करने में तेजाब का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में प्रयोग करने के बाद तेजाब को टैंकरों में भरने के बाद अरावली की जमीन पर ऐसे ही डाल दिया जाता है।
कई बार पाली गांव के लोगों ने इन संचालकों को चेतावनी दी। जिसके कारण ये लोग तेजाब के टैंकरों को अब सरकारी बोरवेल में डाल देते हैं। जिसके कारण ये तेजाब सीधे प्राकृतिक स्त्रोत में मिल जाता है। अभी हाल ही में पाली गांव निवासी रोहताश की गाय गड्ढे में भरे तेजाब को पानी समझकर पी गई और उसकी मौत हो गई।