प्रवासियों की शरणगाह कहा जाने वाला औद्योगिक नगर फरीदाबाद महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। यहां हर दूसरे घंटे में कोई न कोई महिला यौन हिंसा, दहेज उत्पीड़न और छेड़खानी का शिकार होती है।
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इस साल 31 मई तक सिर्फ महिला थाने में ही महिला उत्पीड़न संबंधी 1825 केस दर्ज किए गए हैं। अन्य थानों में भी करीब दो सौ केस दर्ज हैं। हालांकि पुलिस अधिकारी इसे सामाजिक समस्या मानते हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज को जागरूक करके ही दूर किए जा सकते हैं।
पुलिस आयुक्त कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 31 मई तक औद्योगिक नगरी मेें 79 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार बनीं, तो 63 के साथ छेड़छाड़ या अश्लील हरकतें की गईं।
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152 किशोरी-युवतियों का अपहरण
अपहरण
दो युवतियों पर एसिड अटैक कर उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी गई। 152 किशोरी-युवतियों का अपहरण किया गया। 11 किशोरियों को शादी का झांसा देकर भगा ले जाया गया। चार युवतियों को वेश्यावृत्ति के दलदल में ढकेला गया।
सबसे ज्यादा उत्पीड़न विवाहिताओं को झेलना पड़ा। दहेज उत्पीड़न के 241 मामले दर्ज किए गए, जबकि 19 विवाहिताओं को दहेज की वजह से जान गंवानी पड़ी। एक महिला पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महिला संबंधी अपराध में फरीदाबाद प्रदेश में सबसे आगे है।
उन्होंने बताया कि महिला संबंधी अपराध कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था का प्रश्न है। आंकड़ों के आधार पर उन्होंने बताया कि यहां अधिकतर केस में पीड़ित और आरोपी दोनों ही प्रवासी होते हैं।
इन वजहों से लोग यौन हिंसा करते हैं
महिला अधिकार कार्यकर्ता और लेखिका रश्मि सिंह कहती हैं कि प्रवासी समाज में पारिवारिक मूल्य उतने गहरे नहीं होते हैं, जितने कि पारंपरिक समाज में। बाहर रहने वाले युवाओं पर माता-पिता का अंकुश नहीं होता है, यही वजह है कि वह गलत संगत में पड़कर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं। उनका मानना है कि जिस तरह मां-बाप लड़कियों को अच्छे संस्कार देते हैं, लड़कों को भी महिलाओं के प्रति सम्मान की शिक्षा दी जाए।
पार्क हॉस्पिटल के न्यूरो साइकियोट्रिस्ट डॉ. केके शर्मा कहते हैं कि यौन हिंसा के कारणों को एक शब्द में बयान नहीं किया जा सकता। यह एक तरह की दिमागी बीमारी है, जो फ्रस्टेशन, गुस्सा, डिप्रेशन एडिक्शन जैसी वजहों से पैदा होती है।
इन वजहों से परेशान लोग यौन हिंसा करते हैं। लोग हमेशा अपने से कमजोर पर जोर दिखाते हैं, महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कमजोर होती हैं, यही वजह है कि हिंसा और यौन हिंसा का शिकार होती हैं। डॉ. शर्मा कहते हैं कि सामाजिकता और जागरूकता बढ़ाकर इस समस्या से काफी हद तक निजात पाई जा सकती है।
महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध के बावजूद यह बात सुकून देने वाली है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई भी पुलिस उतनी ही तेजी से कर रही है। महिला थाने के मुताबिक, 31 मई तक 1825 केस दर्ज किए गए। इनमें से 1622 केस में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 800 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसएचओ महिला थाना इंस्पेक्टर सुशील ने कहा कि अन्य पेंडिंग केस पर भी कार्रवाई जारी है।
केस एक : आसाम से अच्छी परवरिश दिलाने के बहाने लाई गई किशोरी को एक दंपति ने ही हवस का शिकार बनाया। सात माह तक यौन उत्पीड़न का शिकार बनती रही अनाथ किशोरी अब पुलिस संरक्षण में एनजीओ के पास है।
केस दो : सदर बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र में रहने वाले एक पिता ने अपनी ही बेटी के साथ तीन माह तक किया दुष्कर्म। किसी को बताने पर मां को जान से मारने की धमकी देता था। तंग आकर बालिका ने मां को सुनाई आपबीती।
केस तीन : सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र में रहने वाली विवाहिता दहेज नहीं दे सकी, तो उसके साथ जेठ और ससुर ने शारीरिक छेड़छाड़ की और पति ने अप्राकृतिक यौन संबंध बनाकर पीड़ित किया।
केस चार : एसजीएम नगर में रहने वाली छात्रा का फोटो खींचकर उसके पड़ोसी युवक ने ब्लैकमेल करना शुरू किया। यौन संबंध बनाने को मजबूर किया।