पूर्वी एमसीडी और उत्तरी एमसीडी के वित्तीय संकट से पार्षदों को ‘लोकल एरिया फंड’ रिलीज नहीं हो रहा है। कहीं दो महीने, तो कहीं चार महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी सड़कों पर उतर रहे हैं। सबसे खराब हालत पूर्वी एमसीडी की है। ठेकेदारों के बिलों का भुगतान नहीं किए जाने से विकास कार्य रुक गए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन की अगुवाई में निगम के नेताओं ने उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करके ये समस्याएं गिनवाईं और ज्ञापन दिया। माकन ने कहा कि दिल्ली और केंद्र सरकार की लड़ाई में जनता पिस रही है।
दिए गए ज्ञापन में उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने उपराज्यपाल से कहा कि चौथे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने और एकमुश्त वित्तीय सहायता से ही एमसीडी की हालत सुधर सकती है।
पूर्वी एमसीडी पर 1900 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं
पूर्वी दिल्ली की नेता विपक्ष वरयाम कौर ने ज्ञापन में कहा है कि विकास कार्य रुक गए हैं। पेंशन, मेडिकल बिल, कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है। डॉक्टर, नर्स, टीचर सहित अधिकारी एसोसिएशन भी धरने पर उतर आए हैं।
ज्ञापन में मांग की है कि एकमुश्त आर्थिक सहायता के अलावा वार्षिक 600 करोड़ रुपये अगले पांच साल तक मिलना जरूरी है। उनका कहना है कि पूर्वी एमसीडी पर 1900 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। दिल्ली सरकार ग्लोबल शेयर नहीं दे रही है।
उत्तरी एमसीडी में जून, 2015 से ठेकेदारों के बिल का भुगतान और पेंशनधारियों की पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। डिस्पेंसरी में दवाइयां नहीं हैं। माकन ने बताया कि उपराज्यपाल ने चौथे वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए दिल्ली सरकार से बात करने का भरोसा दिया है।
विज्ञापन के लिए पैसा, तो एमसीडी के लिए क्यों नहीं?
माकन ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल कहते हैं कि उनका केंद्र के साथ झगड़ा है। जब-जब नगर निगमों में वित्तीय संकट हुआ है, तो सरकार ने ग्रांट-इन एड से एमसीडी को आर्थिक सहायता देकर पहले भी उबारा है।
अब इतनी खस्ता हालात में भी केजरीवाल ने चौथे वित्त आयोग की सिफारिश में केंद्र सरकार की तरफ से पैसे मिलने की शर्त जोड़ दी है। वहीं, विज्ञापन में 526 करोड़ रुपये रखकर उसे खर्च कर रहे हैं।
पूर्वी दिल्ली में एमसीडी विकास कार्य नहीं कर रही है, तो यमुनापार विकास बोर्ड से भी काम नहीं हो रहा है।