आईआईटी के कैंपस अब विदेशों में भी होंगे। आईआईटी अब अपने कैंपस अब मलेशिया, यूएई, बहरीन और इंडोनेशिया में बनाने की तैयारी कर रहा है। इन विदेशी कैंपस में जेईई एडवांस की मेरिट से नहीं दाखिले नहीं होंगे। आईआईटी की योजना है कि विदेशी कैंपस में इंटरनेशनल मानकों और एडवांस की तर्ज पर एक नई दाखिला प्रवेश परीक्षा करवाकर उसकी मेरिट से सीट दी जाए।
इन कैंपस में स्नातक प्रोग्राम, विदेशी मूल और भारतीय मूल के विदेश में रहने वाले छात्रों पर फोकस होगा। खास बात यह है कि आईआईटी खड़गपुर मलेशिया, दिल्ली यूएई और कानपुर बहरीन या इंडोनेशिया में अपना कैंपस स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।
आईआईटी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, विदेशों में कैंपस बनाने का मकसद विदेशों में आईआईटी ब्रांड को लेकर जाना है। विदेशी कैंपस में स्नातक प्रोग्राम यानी बीटेक कोर्स की पढ़ाई पर फोकस रहेगा। दूसरी योजना में एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम में विदेशी छात्रों को रिसर्च क्षेत्र में भारत के आईआईटी कैंपस से जोड़ना है। यह दोनों अलग- अलग योजनाएं हैं, लेकिन एक साथ चल रही हैं।
विदेशों में बनने वाले आईआईटी कैंपस में पढ़ाई, दाखिला आदि में किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं होगा। आईआईटी ब्रांड और गुणवत्ता को बरकार रखने पर आईआईटी काउंसिल इसके लिए विशेष मापदंड तैयार करेगी। इन कैंपस में इंटरनेशनल नियमों के तहत भारत में लागू आरक्षण नियम का लाभ छात्र और शिक्षकों दोनों को नहीं मिलेगा। दुनियाभर में आईआईटी का परचम लहराने के मकसद से फैकल्टी भारत के अलावा दुनिया भर के देशों से ज़ुड़ सकती है। यहां गुणवत्ता और मेरिट के आधार पर नियुक्ति होगी। इंटरनेशनल मानकों के तहत ही 10 छात्रों पर एक फैकल्टी का नियम लागू होगा। एक विभाग में कम से कम 20 फैकल्टी रखनी अनिवार्य रहेगी।
23 आईआईटी में एक हजार विदेशी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप
आईआईटी गांधीनगर में सभी 23 आईआईटी की बैठक हुई है। इसमें सामने आया है कि फंडिंग की कमी के चलते विदेशी छात्र भारत आकर पढ़ाई करने में फीस न दे पाने के कारण असमर्थ हैं। इसीलिए सभी 23 आईआईटी ने फैसला लिया है कि विदेशी छात्रों के लिए पहले चरण में एक हजार अतिरिक्त सीट (न्यूमेरी सीट ) तैयार की जाएगी, जोकि स्कॉलरशिप सीट होंगी।
इसका मकसद विदेशी छात्रों को एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम के माध्यम से रिसर्च क्षेत्र से जोड़ना है। इसके अलावा जिन देशों के छात्र सबसे अधिक भारत आकर पढ़ाई करते हैं, वहां भारत सरकार रोजगार के अवसर बढाएगी। आईआईटी ने 50 से 100 विकासशील देशों की सूची तैयार की है, जहां के छात्रों को भारत के आईआईटी कैंपस में एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम से जोड़ा जा सके।
आईआईटी इंटरनेशनल सेंटर से विदेशों में आईआईटी का प्रचार
विदेशी छात्रों को आईआईटी से बीटेक से लेकर पीएचडी प्रोग्राम में जोड़ने के लिए आईआईटी इंटरनेशनल सेंटर बनाये जाएंगे। यह विदेशी छात्रों को आईआईटी से जोड़ने के लिए एक हब के तौर पर काम करेंगे। आईआईटी एल्यूमनाई के अलावा भारतीय दूतावास भी मदद करेंगे। इसमें खर्चा भी नहीं होगा और आईआईटी के विदेशी कैंपस से लेकर भारत के कैंपस में एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम में दाखिले के लिए प्रचार भी हो जाएगा।