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'आतंकवाद से लड़ने वाले पति को शर्मिंदा करना और उसकी झूठी शिकायत करना क्रूरता है'

Mon, 26 Sep 2016 10:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोर्ट - फोटो : file photo
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कश्मीर में आतंकवाद से लड़ने वाले पति (सीआरपीएफ कमांडेंट) के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों से झूठे व बेबुनियाद आरोप लगाना उसे गंभीर संकट में डालना ही नहीं, बल्कि उसकी प्रतिष्ठा भी खराब करना है।
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यह एक क्रूरता है। इस आधार पर पति तलाक लेने का हकदार है। न्यायाधीश प्रदीप नंदराज योग व न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में पति सीआरपीएफ में एक वरिष्ठ अधिकारी है।

उस पर अधिकारिक जिम्मेदारी थी और उम्मीद की जाती थी कि पत्नी पति का साथ दे। लेकिन उसने पति के वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी शिकायतें दी कि पति के कश्मीरी परिवार से संबंध हैं। लिहाजा, जांच कर उसका तबादला किया जाए।
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'सहयोगियों व मातहत के सामने भी शर्मिंदा होना पड़ा'

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खंडपीठ ने कहा कि पत्नी के झूठे व बिना आधार के आरोपों से पति के काम पर प्रतिकूल असर पड़ा और वह गंभीर संकट में फंस गया। उसे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ही नहीं, बल्कि सहयोगियों व मातहत के सामने भी शर्मिंदा होना पड़ा। 

उसकी प्रतिष्ठा नष्ट हुई। अपमान व पीड़ा का सामना करना पड़ा है। पति-पत्नी का संबंध आपसी समझ, विश्वास, प्रतिबद्घता से चलता है। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में परिवार अदालत ने दोनों का तलाक स्वीकार कर सही निर्णय दिया है। इस फैसले को चुनौती देने संबंधी पत्नी का तर्क उचित नहीं है। अत: उसकी याचिका खारिज की जाती है।

वर्ष 1975 में हुई थी शादी
पेश मामले के अनुसार, दोनों को विवाह मेरठ में दिसंबर, 1975 को हुआ था। उनके दो बच्चे हुए। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी का व्यवहार उसके प्रति गलत होने अलावा उसके परिवार के प्रति भी अनादरपूर्ण रहा है। इसी कारण दोनों का एक साथ रहना संभव नहीं था।
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