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स्मृति के इस प्लान से DU में मचेगा बवाल!

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय ग्रेजुएशन को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता लगातार डीयू प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
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उधर, केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने से इस मामले को और थोड़ा बल मिल गया है। इसके पीछे दो मुख्य वजहें हैं।

पहली वजह यह है कि एबीवीपी, बीजेपी का ही छात्र संगठन है और दूसरी सबसे बड़ी वजह ये है कि बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस बात का वादा किया था कि अगर केंद्र उनकी सरकार बनी तो वह डीयू में तीन वर्षीय पाठ्यक्रम की बहाली करेगी।
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100 दिनों के प्लान का हिस्सा!

टीओआई के अनुसार, एचआरडी मिनिस्टर के तौर पर पदभार संभालते ही विवादों में घिरीं स्मृति ईरानी इस मामले में ज्यादा तेजी नहीं दिखा रही हैं। अब चार वर्षीय ‌डिग्री कोर्स को समाप्त करने के मामले में कोई भी फैसला जल्दबाजी होगी। इससे और भी आलोचना झेलनी पड़ सकती है।

इस मामले में समय रहते सोच विचार के बाद फैसला लिया जाएगा। यह मु्ददा 100 दिनों के प्लान का हिस्सा हो सकता है।

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि तीन वर्षीय पाठ्यक्रम को वापस लागू करने के लिए तमाम वैध कारण मौजूद हैं। हालांकि ऐसा करने में सबसे बड़ी समस्या उन छात्रों को आएगा जिन्होंने चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स का एक साल पूरा कर लिया है। उन छात्रों ने अभी सिर्फ फाउंडेशन की पढ़ाई की है। अगर पुराना कोर्स लागू होता है तो वह नए छात्रों के लिए ही लागू होगा।
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विरोध के बावजूद वीसी ने लगाया जोर

इस मामले में एचआरडी मिनिस्ट्री के एक सूत्र ने बताया कि डीयू के कुलपति ने एजुकेशन सेक्रेटरी अशोक ठाकुर को इस बात के लिए राजी करने की पूरी कोशिश की है। सूत्रों के अनुसार वीसी ने कोर्स की प्रासंगिकता को लेकर अपना पक्ष उनके सामने रखा था।

एचआरडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में एचआरडी मिनिस्ट्री के ज्यादा दबाव आरएसएस और बीजेपी का है। यही नहीं, इस मामले में नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट और दूसरे संगठन भी विरोध के सुर भर चुके हैं।

हालांकि, 30 मई को दिल्ली बीजेपी कार्यालय में हुई एनडीएफटी मीटिंग में स्मृति ईरानी भी पहुंचीं थीं। मीटिंग में पार्टी के सांसदों ने इस बात का फैसला किया था कि चार वर्षीय प्रोग्राम को जारी रखा जाएगा और इस मामले में सभी पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर भी गौर किया जाएगा। नेताओं ने कहा था कि वे अपने वादे को पूरा करेंगे।
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