दिल्ली में बीते चार महीने से चल रहा राजनीतिक संकट टलने की उम्मीद है। दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को कांग्रेस के विधायक सपोर्ट कर सकते हैं।
विधानसभा में आठ में से छह कांग्रेसी विधायक पार्टी से अलग होकर नया गुट बना सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इन विधायकों में आपसी सहमति बन चुकी है और ये कभी भी नए दल की घोषणा कर सकते हैं।
कांग्रेस विधायक दल में यह फूट दिल्ली में सरकार बनाने का रास्ता साफ करेगी।
कांग्रेस की बैठक में दिखी फूट
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस की खराब हालत के चलते विधायक दोबारा चुनाव में जाने से बच रहे हैं। उन्हें इस बात का डर है कि चुनाव होने पर उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों ने बताया कि बीते रविवार को प्रदेश कांग्रेस की एक बैठक में नए गुट के छह में से चार विधायक पहुंचे, जबकि दो ने आने से मना कर दिया।
बैठक में आम आदमी पार्टी को किसी भी कीमत पर समर्थन नहीं देने के प्रस्ताव का समर्थन की बात आई तो वहां मौजूद चार विधायकों ने इस पर हामी भरने तक से इनकार कर दिया।
बीजेपी पूरा करेगी मैजिक आंकड़ा
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस से अलग होकर नया गुट बनाने वाले छह विधायकों में से तीन मुस्लिम और तीन अन्य संप्रदाय के हैं।
मुस्लिम विधायक भाजपा के साथ जाने से हिचकिचा रहे हैं, जबकि अन्य विधायक भाजपा को समर्थन देने के लिए राजी हैं। इन विधायकों ने भाजपा व 'आप' दोनों दलों के नेताओं से संपर्क साधा है।
सरकार बनाने के मामले में यदि बीजेपी से बात बन गई तो छह विधायकों का ये गुट एक बार फिर से टूटेगा और भाजपा के साथ शामिल होकर सरकार बनाएगा।
ऐसे बनेगी बीजेपी सरकार
शिरोमणि अकाली दल को मिलाकर भाजपा के पास अभी कुल 29 विधायक हैं। वर्तमान में 67 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को कुल 34 विधायकों की जरूरत है।
फिलहाल दिल्ली के दो निर्दलीय विधायक बीजेपी को समर्थन देने को राजी हैं। ऐसे में कांग्रेस के यदि तीन विधायक भी बीजेपी से मिलते हैं तो वह बड़े आराम से सरकार बनाने के मैजिकल आंकड़े का छू लेगी।
बाद में सरकार बनने के बाद स्थितियां बदलेंगी और दूसरे विधायक भी बीजेपी को समर्थन दे सकते हैं।
'कांग्रेस नहीं करेगी समर्थन'
दिल्ली में सरकार बनाने के मामले में बीजेपी या आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने साफ इंकार किया है।
लवली ने कहा था कि आप को दोबारा समर्थन देकर पार्टी फिर वही गलती नहीं दोहराना चाहती। जबकि बीजेपी को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता।
उधर, कांग्रेस विधायक मतीन अहमद इस बात पर जोर दे रहे हैं कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को किसी एक दल को समर्थन देना चाहिए। इससे दोबारा चुनाव के बोझ से बचा जा सकेगा।