सभी जानते हैं कि 9 फरवरी को जेएनयू में अफजल गुरु की बरसी का आयोजन होने के बाद से देशद्रोह के मामले में घिरे जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पीएचडी के छात्र हैं। और पीएचडी करने के बाद उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री मिल जाएगी।
कन्हैया की यही डॉक्टरेट की डिग्री अब एक हिंदूवादी संगठन वीर सेना के लिए बहुत बड़े चिंता का विषय बन गई है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू के अनुसार इस संगठन की चिंता है कि आखिर डॉक्टर बनने के बाद कन्हैया अपने मरीजों का इलाज कैसे करेंगे?
वीर सेना के निरंजन पाल कहते हैं कि 'हम जानते हैं कि कन्हैया कुमार जेएनयू से पीएचडी की डिग्री ले रहे हैं और वो देश के टुकड़े करने की धमकी दे रहे हैं। आखिर उनके जैसा कोई शख्स अपने मरीजों का इलाज कैसे कर सकता है, आखिर कौन मरीज उनसे इलाज कराने आएगा?'
बता दें कि 23 अप्रैल को कन्हैया किसी कार्यक्रम के लिए मुंबई जा रहे हैं और निरंजन पाल ने कन्हैया को ठीक-ठाक वापस न जाने देने की बात कही है। जब निरंजन से पूछा गया कि कन्हैया मेडिकल नहीं साहित्य पढ़ रहे हैं तब भी वो अपनी ही बात पर अड़ा रहा। उसने कहा, 'तो क्या हुआ वो बनेगा तो डॉक्टर ही ना और मरीज उसके पास आएंगे ही।'
अपने आप को राष्ट्रवादी संस्था बताने वाली कई छोटी-छोटी संस्थाओं ने आज मुंबई में प्रेस कांफ्रेंस कर कन्हैया को यह चेतावनी दी कि अगर वो मुंबई आ गया तो वो सही-सलामत वापस नहीं जा पाएगा।
स्वराज्य हिंदू सेना के सुशील तिवारी ने कहा कि यह क्रिया नहीं प्रतिक्रिया है। जो भी देशद्रोही गतिविधियों से जुड़े हैं उन्हें उसे रोकना होगा और हमसे इसके लिए जो भी बन पड़ेगा हम करेंगे।
वहीं हिंदू गोवंश रक्षा समिति ने कहा कि कन्हैया को मुंबई में घुसने से बैन कर देना चाहिए क्योंकि वो शहर का माहौल खराब कर देगा। यही नहीं उसे देश में भी नहीं रहने देना चाहिए।