अगर आप कीमती सामान लेकर शहर के बाजार में घूम रहे हैं तो जगह-जगह मुस्तैद दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं कीजिएगा। यह वर्दीधारी झपटमारी कर भाग रहे बदमाशों का पीछा नहीं कर सकेंगे।
वजह इनमें से अधिकतर मोटापे व अन्य बीमारियों का शिकार हैं और इनके स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए विभाग की ओर से कुछ नहीं किया जा रहा।
डीसीपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिपाही और एएसआई रैंक के पुलिसकर्मियों को नियुक्ति से पहले तीन माह की ट्रेनिंग दी जाती है। नौकरी में आने के बाद शारीरिक फिटनेस बनाए रखना पुलिस वालों की जिम्मेदारी होती है।
फिटनेस पर ध्यान नहीं दे पाते ये
ड्यूटी के अनियमित घंटे, भोजन का अनिश्चित समय और काम की अधिकता के चलते अधिकतर पुलिस वाले फिटनेस पर ध्यान नहीं दे पाते और बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
नियमित एक्सरसाइज नहीं कर पाने की वजह से इनमें मोटापा, हाई ब्लडप्रेशर, तनाव, पेट की बीमारियां आम हैं। उन्होंने बताया कि 40 साल से ऊपर की उम्र वाले अधिकतर पुलिसकर्मी अनफिट हैं।
उनके मुताबिक लगभग दस फीसदी पुलिस वाले मोटापे का शिकार हैं जबकि बीस फीसदी से ज्यादा अनफिट की श्रेणी में आते हैं।
बताते हैं कि इनके सामने ही हुई है वारदातें
बताते हैं कि शहर में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें बदमाश पुलिस वालों के सामने चेन, पर्स, मोबाइल आदि झपट कर फरार हो गए। अनफिट शरीर और तोंद के चलते यह पुलिस वाले बदमाशों के पीछे भाग ही नहीं सके।
फिलहाल इन्हीं पुलिस वालों के जिम्मे शहर की सुरक्षा व्यवस्था है। पुलिस आयुक्त सुभाष यादव ने कहा कि पुलिसकर्मियों की फिटनेस को लेकर वह गंभीर हैं।
जल्द ही स्वास्थ्य चेकअप कैंप लगवाया जाएगा, इसके अलावा फिटनेस कार्यक्रम शुरू करवाए जाएंगे जिनमें पुलिस कर्मियों को कुछ दिन की ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी।
साहब की सुरक्षा में लगती है फिट पुलिस
शहर की जनता की हिफाजत का जिम्मा अधेड़ और अनफिट पुलिस वालों पर है जबकि वीआईपी, अधिकारी और विशिष्ट लोगों की सुरक्षा व्यवस्था में छरहरे और युवा पुलिस वालों को लगाया जाता है।
एसीपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि वीआईपी और अधिकारी अपनी सुरक्षा के लिए तेज तर्रार और छरहरे पुलिस वालों को रखना पसंद करते हैं।
इनके साथ लगने वाले एएसआई रैंक के पुलिस वालों का काम साहब की फाइलें उठाना और मशीनगन लेकर घूमना ही होता है, यह काम दूसरे पुलिस वालों से भी कराया जा सकता है।