आपसी विवाद को निपटाने के लिए पति पर तीन बेटियों को दरकिनार करने का आरोप लगाने, पुत्र प्राप्ति के लिए पुनर्विवाह का प्रयास करने, पुत्र के लिए सात बार गर्भपात करवाने, किसी महिला से संबंध इत्यादि संबंधी झूठे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आते है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस प्रकार के झूठे आरोपों के आधार पर पति तलाक लेने का अधिकारी है।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजयोग व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने अपने फैसले में महिला द्वारा पति को तलाक प्रदान करने के फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि पेश सभी साक्ष्यों व तथ्यों से स्पष्ट है कि महिला की तीन बेटियां थी और उसका पति उन्हें प्यार करता था। स्वयं उनकी 19 वर्षीय बेटी के बयानों से स्पष्ट है कि उनका पिता अलग रहने के बावजूद हमेशा उनकी हर इच्छा का ध्यान रखता था।
अदालत ने कहा कि पति द्वारका जैसे क्षेत्र में फ्लैट होने के बावजूद स्वयं किराए के मकान में मात्र इस कारण रहने चला गया ताकि उसकी पत्नी व तीन बेटियां उस फ्लैट में रह सके। स्पष्ट है कि इस मामले में तीन बेटियां वैवाहिक कलह का कारण नहीं था। सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि वह एक जिम्मेदार पति और पिता है।
पत्नी के सभी आरोप निकले बेबुनियाद
Divorce
अदालत ने कहा कि पति अलग किसी अन्य महिला के साथ रहने के लिए गया संबंधी तर्क भी बेबुनियाद पाया गया है। वह मात्र इस कारण अलग रहने के लिए गया क्योंकि पत्नी ने महिला अपराध शाखा, महिला आयोग व अन्य विभिन्न एजेंसियों में शिकायत करने के अलावा उसके आफिस तक में शिकायत कर दी थी।
वह स्वयं को इस फर्जी मामलों से बचने व गिरफ्तारी के डर से गया था। स्वयं पत्नी ने भी माना है कि उसने महिला से संबंध का आरोप इस लिए लगाया था कि पति वापस घर आ जाए। अदालत ने कहा कि यह मानसिक क्रूरता है।
इसी प्रकार स्वयं महिला ने माना है कि जब उसके दूसरी लड़की हुई तो उसकी सास व ननद उसके पास रहने आई व दो वर्ष तक देखभाल की। वहीं दूसरी तरफ उसका आरोप है कि दूसरी बेटी के बाद ससुराल पक्ष ने पति को उसे घर से बाहर फेंक कर दूसरे विवाह के लिए कहा था। स्पष्ट है कि आरोप फर्जी थे।
ये है पूरा मामला
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खंडपीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद माना था कि महिला द्वारा लगाए सभी आरोप झूठे थे। महिला ने कहा कि था पति पुत्र चाहता था, पुत्र की लालसा में दूसरा विवाह करना चाहता था, पुत्र प्राप्ति के लिए तांत्रिक के पास जाता था, पुत्र के लिए उसका 7-8 बार गर्भपात करवाया, किसी महिला से अवैध संबंध्धथे, आफिस में फर्जी शिकायत की, कई अन्य मामले दर्ज करवाएं।
खंडपीठ ने कहा कि यह भी एक गंभीर मामला है कि पत्नी ने बच्चों सहित आत्महत्या की धमकी दी थी। यह सभी मानसिक प्रताडना है और क्रूरता की श्रेणी में आते है और यह तलाक का आधार है।
क्या है मामला-
पेश मामले में महिला टीचर पद पर कार्यरत थी जबकि उसका पति सरकारी नौकरी में था। दोनों का 28 फरवरी 1994 में विवाह हुआ था। उनके क्रमश: वर्ष 94, 96 व 2004 में तीन पुत्रियों ने जन्म लिया। पति के अनुसार विवाद का मुख्य कारण उसकेससुराल पक्ष द्वारा द्वारका में उनके फ्लैट के पास फ्लैट लेना व उसके परिवारिक मामलों में हस्तक्षेप करना था। दोनों करीब 10 वर्ष से अलग रह रहे थे।