जापान और चीन की तर्ज पर भारत में हाईस्पीड ट्रेन चलाने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन विदेशों की तुलना में आधे संसाधन भी अपने रेल मंत्रालय के पास नहीं हैं। शताब्दी और राजधानी ट्रेनों के लिए सुरक्षित रेल ट्रैक तक नहीं है। अधिकांश ट्रैक जर्जर हालत में हैं।
ट्रैकों की पेट्रोलिंग न होने की वजह से जगह-जगह से पेंड्रोल क्लिप और फिश प्लेट क्षतिग्रस्त है। ऐसे हालातों में दिल्ली-कानपुर रूट पर हाईस्पीड ट्रेनें दौड़ाई गईं तो पटरियां तक उखड़ जाएंगी। जर्जर हो चुकी लाइनें, स्लीपर और पेंड्रोल क्लिप कभी भी धोखा दे सकते हैं।
ऐसे में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने से पहले रेलवे को ट्रैक बदलने होंगे। पुराना गाजियाबाद स्टेशन से गौशाला फाटक तक ट्रैकों का जायजा लिया गया तो सैकड़ों पेंड्रोल क्लिप गायब मिले। स्लीपर पर पेंड्रोल क्लिप के लिए लगाए गए लोहे के कब्जे भी जंग से गले हुए हैं।
स्टेशन से चंद मीटर की दूरी पर ही ट्रैक से पांच-पांच मीटर तक पेंड्रोल क्लिप गायब मिले। ट्रैक पर लगी फिश प्लेट भी अच्छी स्थिति में नहीं मिली। कई स्थानों पर फिश प्लेट सिर्फ एक नट बोल्ट पर लगी मिली।
उनके तीन-तीन नट बोल्ट गायब मिले। अधिकतर स्थानों पर फिश प्लेट के नट बोल्ट ऐसी स्थिति में मिले कि उन्हें हाथ से ही खोला जा सकता है।