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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने 1,723 पीजी इमारतों के बारे में अधिकारियों से मांगा जवाब

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने के बाद नगर निगम (एमसीडी) द्वारा सर्वेक्षण की गई 2,453 पेइंग गेस्ट (पीजी) इमारतों में से केवल 730 के स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध होने पर नाराजगी जताई। अदालत ने पूछा कि बाकी 1,723 इमारतों का क्या होगा, जिनके प्लान नहीं मिल पाए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने एमसीडी से पूछा, 2,453 पीजी हैं, आपके पास सिर्फ 730 के बिल्डिंग प्लान हैं। यह एक-तिहाई से भी कम है। बाकी दो-तिहाई का क्या? अदालत ने पूछा कि जिन इमारतों के प्लान उपलब्ध नहीं हैं, उनके खिलाफ कानून कब अपना काम करेगा। खंडपीठ सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुई इमारत दुर्घटना से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी।


एमसीडी के वकील ने बताया कि निगम स्वीकृत प्लान खोजने की कोशिश कर रहा है और मालिकों से भी मांगे जा रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ इमारतें 50-60 साल पुरानी हैं और रिकॉर्ड खोजने के प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से निर्देश लेने के लिए समय मांगा। एमसीडी के हलफनामे के अनुसार, 6 से 23 सितंबर के बीच 543 संपत्तियों को गिराया गया, 178 सील की गईं, 354 अनधिकृत निर्माण के नोटिस, 205 सीलिंग नोटिस और 98 विध्वंस आदेश जारी किए गए। सर्वेक्षण में 2,453 पीजी इमारतें मिलीं, जिनमें 32,247 कमरे और करीब 50,529 लोग रह रहे हैं। इनमें से 2,342 सुरक्षित पाई गईं, 91 में मामूली मरम्मत, 30 में बड़ी मरम्मत और 4 खतरनाक हालत में हैं।
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अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हलफनामे को पूरी तरह अस्पष्ट बताया। डॉ. किरण बेदी के हस्तक्षेप आवेदन पर अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में संबोधित करने की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई 15 दिन बाद होगी।
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