कंसोर्टियम द्वारा पांच सवाल वापस लेने पर अब तीन सवालों पर कोर्ट सुनाएगा फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट स्नातकोत्तर (क्लैट पीजी) के प्रश्नों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (एनएलयू) के कंसोर्टियम की ओर से सवालों पर आपत्ति जताने के लिए उम्मीदवारों से शुल्क वसूलने पर सवाल उठाया और नाराजगी व्यक्त की। वहीं, कंसोर्टियम ने सुनवाई के दौरान चार प्रश्नों को स्वतः वापस लेने का फैसला किया। उम्मीदवारों ने याचिका कुछ सवालों में गलतियों, उन सवालों पर आपत्ति उठाने के लिए प्रति सवाल 1000 रुपये शुल्क और आपत्ति उठाने के लिए केवल एक दिन का समय देने के खिलाफ दायर की थी।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई में नोट किया कि याचिकाकर्ता-उम्मीदवारों ने कंसोर्टियम द्वारा दी गई एक दिन की समय सीमा के भीतर आपत्तियां दर्ज नहीं की थीं। उम्मीदवारों का कहना है कि आपत्ति के लिए एक दिन का समय बहुत कम है। शुरू में आठ प्रश्नों को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। वहीं, कंसोर्टियम ने कोर्ट ने यह बताया कि उसने चार प्रश्नों को स्वतः वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा, याचिकाओं के मद्देनजर पीजी कोर्स की काउंसलिंग प्रक्रिया को रोक दिया गया है। कंसोर्टियम के 4 अप्रैल को अपनी आंतरिक बैठक में चार प्रश्नों को वापस लिए जाने के बाद मंगलवार की सुनवाई में बचे हुए चार प्रश्नों पर बहस हुई।
फैसला सुरक्षित करने के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील गुप्ता ने एक प्रश्न के संबंध में एक गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों को वितरित प्रश्न पत्र में सही विकल्प मास्टर बुकलेट में दिए गए विकल्प से भिन्न थे। इसके बाद, कंसोर्टियम ने इस प्रश्न को भी वापस लेने का फैसला किया और कोर्ट को एक संयुक्त नोट के माध्यम से इसकी जानकारी दी। अब कोर्ट शेष तीन प्रश्नों पर अपनी आपत्तियों पर फैसला सुनाएगा, जिस पर उसने आदेश सुरक्षित रखा है। हाईकोर्ट इससे पहले क्लैट यूजी परीक्षा के प्रश्नों पर उठाए गए सवालों पर उम्मीदवारों की याचिका पर फैसला सुना चुकी है।
कंसोर्टियम के प्रति प्रश्न 1000 रुपये आपत्ति शुल्क पर हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
हाईकोर्ट ने क्लैट 2025 के स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स के लिए प्रोविजनल उत्तर कुंजी में आपत्ति दर्ज करने के लिए एनएलयू कंसोर्टियम द्वारा प्रति प्रश्न 1,000 रुपये का अत्यधिक शुल्क वसूलने पर कड़ा ऐतराज जताया। खंडपीठ ने कहा कि यह शुल्क विभिन्न आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए निषेधात्मक है और यह कई लोगों की मासिक आय के बराबर हो सकता है। न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा, प्रति प्रश्न 1,000 रुपये का शुल्क कैसे उचित ठहराया जा सकता है? इस परीक्षा में सभी आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल होते हैं। यह डराने वाला कदम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ आर गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं इतना अधिक पंजीकरण शुल्क या आपत्ति शुल्क नहीं वसूलतीं। उन्होंने कहा, पहले ही 4,000 रुपये पंजीकरण शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं। यह कंसोर्टियम के लिए लाभ कमाने का साधन नहीं हो सकता। कंसोर्टियम ने कोर्ट को बताया कि यदि आपत्ति सही पाई जाती है, तो शुल्क तुरंत वापस कर दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि फालतू आपत्तियों को रोकने के लिए उच्च शुल्क लिया जाता है। साथ ही, विशेषज्ञों को बुलाने और आपत्तियों की जांच करने की प्रक्रिया समय लेने वाली होती है, जो इस शुल्क को उचित ठहराती है।