हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन को निलंबित करने की मांग संबंधी जनहित याचिका को खारिज करते हुए गेंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पाले में डाल दी। अदालत ने कहा, मुख्यमंत्री को किसी मंत्री को हटाने का निर्देश देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री का कर्तव्य राज्य के सर्वोत्तम हित में कार्य करना है। साथ ही यह तय करना है कि क्या आपराधिक पृष्ठभूमि या जिस पर नैतिक अधमता से जुड़े अपराधों का आरोप लगाया गया है, उसे मंत्री के रूप में बने रहने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के सदस्यों को चुनने और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति से संबंधित नीति तैयार करने में अपने विवेक का प्रयोग करते हैं। सुशासन केवल अच्छे लोगों के हाथ में है। अदालत सांविधानिक पदाधिकारियों को संविधान के लोकाचार को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए याद दिला सकता है। एक अनुमान है कि मुख्यमंत्री को इस तरह के सांविधानिक सिद्धांतों द्वारा अच्छी तरह से सलाह और मार्गदर्शन दिया जाएगा, जैसा कि भारतीय संविधान के जनक डॉ बीआर अंबेडकर ने संविधान सभा की बहस के दौरान कहा था।
पीठ ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि संविधान अच्छा हो सकता है, इसका बुरा होना निश्चित है क्योंकि जिन्हें काम करने के लिए बुलाया जाता है, वे बुरे हो सकते हैं। आशा करते हैं कि मुख्यमंत्री अपने उस विश्वास को कायम रखेंगे जो लोगों को व्यक्तियों की नियुक्ति करते समय एक प्रतिनिधि लोकतंत्र की नींव रखता है। मंत्री जैन वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।