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एमसीडी चुनाव: हाईकोर्ट ने पूछा क्या वीवीपैट प्रणाली का इस्तेमाल केवल एम-3 ईवीएम के साथ हो सकता, दिए ये निर्देश

Tue, 22 Mar 2022 09:40 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने मंगलवार को आदमी पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज द्वारा दिल्ली के राज्य चुनाव आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के साथ आगामी एमसीडी चुनाव करने की मांग वाली याचिका की सुनवाई की। जिसमें अदालत ने ईसी से पूछा है कि नगर निगम चुनाव कराने के लिए क्या ईवीएम के साथ वीवीपीएटी उपलब्ध कराया जा सकता है? 
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दिल्ली हाईकोर्ट ने ईसी को दिए निर्देश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ईसी) को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या वीवीपैट प्रणाली का इस्तेमाल एम-3 ईवीएम के साथ किया जा सकता है और क्या उन्हें नगर निगम चुनाव कराने के लिए दिल्ली राज्य चुनाव आयोग को उपलब्ध कराया जा सकता है?

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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने चुनाव आयोग के वकील को इस मुद्दे पर निर्देश लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इतना ही नहीं अदालत ने मामले से संबंधित अधिकारियों को 24 मार्च को सुनवाई के दौरान उपस्थित होने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने कहा यह भी स्पष्ट किया जाए कि मशीनें कितने समय में उपलब्ध करवाई जा सकती है। अदालत ने यह निर्देश आम आदमी पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में दिल्ली के राज्य चुनाव आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के साथ आगामी एमसीडी चुनाव करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
 

राज्य चुनाव आयोग के वकील ने कहा यह मशीनों की उपलब्धता पर निर्भर

इससे पूर्व राज्य चुनाव आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि वीवीपीएटी का उपयोग केवल आम चुनावों और विधानसभा चुनावों में किया जाता है और नीति के रूप में चुनाव आयोग एम-2 ईवीएम का उपयोग पूरे भारत में नगरपालिका चुनावों के लिए कर रहा है। एम-2 ईवीएम दूसरी जनरेशन की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन है जबकि एम-3 तीसरी जनरेशन की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन है। उन्होंने कहा कि यह मशीनों की उपलब्धता पर निर्भर हैं और अगर चुनाव आयोग उन्हें वीवीपीएटी संगत ईवीएम देता है तो वे इसका उपयोग नगरपालिका चुनावों में कर सकते हैं।

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अदालत ने ईसी के अभिवक्ता के तर्क पर जताई हैरानी

उन्होंने कहा कि एम-2 ईवीएम का इस्तेमाल पूरे भारत में किया जाता है इसलिए उनकी वैधता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता है। चुनाव आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता सुरुचि सूरी ने कहा कि वीवीपीएटी संगत मशीनों के लिए पूछने के लिए एक प्रक्रिया का पालन किया जाना है और उन्हें ऐसा कोई अनुरोध नहीं मिला है। अदालत ने उनके तर्क पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह दिलचस्प है। एक निकाय आता है और कहता है कि अगर चुनाव आयोग देता है तो हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर चुनाव आयोग आता है और कहता है कि हमसे संपर्क नहीं किया गया है।

याची की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि यदि मशीनें उपलब्ध हैं तो उन्हें दिल्ली में निष्पक्ष नगरपालिका चुनाव कराने के लिए दिया जाएगा और यदि मशीनें उपलब्ध नहीं हैं तो यह एक अलग मुद्दा है। उच्च न्यायालय ने पहले राज्य चुनाव आयोग के वकील से निर्देश लेने के लिए कहा था कि दिल्ली नगर निगमों (एमसीडी) के आगामी चुनावों के लिए वीवीपैट के साथ ईवीएम का उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता है। याचिका में कहा कि वीवीपैट मशीनों के बिना ईवीएम मशीनों की सटीकता का पता लगाना और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से इंकार करना लगभग असंभव बना देती है।

वीवीपीएटी के बिना पुराने एम -2 ईवीएम का उपयोग सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत के चुनाव आयोग, (2013) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए एक्सप्रेस निर्देशों के उल्लंघन में है जिसने जोरदार ढंग से मान्यता प्रदान करते हुए कहा था कि कार्यान्वयन ईवीएम में पेपर ट्रेल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। याची ने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयोग का एमसीडी चुनाव 2022 को एम-2 ईवीएम के साथ वीवीपीएटी के बिना आयोजित करने का निर्णय स्पष्ट रूप से गलत है। यह पूरी चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता के बारे में वास्तविक आशंका पैदा करता है यह स्पष्ट रूप से स्वतंत्र, निष्पक्ष और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन किया है।

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