राजधानी के थानों में 2,86,741 वाहन व सामान केस प्रॉपर्टी के रूप में जमा है। मामलों के निपटारे में देरी होने के कारण इनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है और पूछा है कि केस प्रॉपर्टी का निपटारा कैसे किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा के समक्ष पेश रिपोर्ट में पुलिस ने कहा कि राजधानी में दुर्घटनाग्रस्त व चोरी किए गए 25,547 वाहन जब्त किए गए हैं। इनमें से 19,970 वाहन की हालत ऐसी है कि उन पर विचार करने की जरूरत ही नहीं है।
वहीं, 2479 वाहनों को थानों के बाहर खड़ा किया गया है। विभिन्न थानों के मालखाने में नगदी, दस्तावेज, जेवरात आदि जमा है। थानों में कार, तिपहिया व मोटर साइकिल खुले में खड़े हैं।
रिपोर्ट के अनुसार तय नियम के तहत वास्तविक हकदार के नहीं मिलने पर अदालत की मंजूरी के बाद वाहन को जब्त कर लिया जाता है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण ज्यादातर वाहनों व सामान पर कोई दावा ही नहीं करता।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जब्त वाहनों के मामलों के जल्द निपटारे का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यदि ठीक हालत वाले वाहनों को भी 15 दिन थाने में खड़ा कर दिया जाता है तो वह भी चलने लायक नहीं रहता।