उधर, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने बताया कि बबलू, असाबूल और महबूब तीनों की मौत के कारण एक जैसे हैं। इनके फेफड़े काफी सिकुड़े हुए मिले हैं। साथ ही, इनमें कई अति सूक्ष्म कण भी मिले हैं। इनके शरीर पर जलने के निशान भी हैं।
लोकनायक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, तौफीर और शोकिर को आग लगने के बाद हार्ट अटैक आया था। डॉक्टरों ने बताया कि लगभग सभी मृतकों में आंतरिक अंगों का रंग बदला हुआ दिखा। इससे स्पष्ट होता है कि घुटन से उनकी मौतें हुई हैं। हालांकि, विसरा जांच के लिए एफएसएल भेजा हुआ है।
डॉक्टरों ने बताया कि मंगलवार को भी पोस्टमार्टम जारी हैं। आमतौर पर शाम 5 से 6 बजे के बाद पोस्टमार्टम नहीं किए जाते, लेकिन अब डॉक्टर देर रात तक यह काम कर रहे हैं।
कार्बन मोनो ऑक्साइड घातक : एम्स
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फॉरेसिंक विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक का कहना है कि आग की घटनाओं में धुआं इमारत के अंदर भर जाता है औऱ
इसके कारण वहां मौजूद लोगों को घुटन महसूस होने लगती है। इमारत में कार्बन मोनो ऑक्साइड फैल जाए तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई भी पोस्टमार्टम एम्स में नहीं हुआ है, इसलिए वे सटीक जानकारी नहीं दे सकते। विशेषज्ञ होने के नाते उनका
मानना है कि घुटन की वजह से लोगों की मौत हुई।