एक ओर बीड़ी सिगरेट और तंबाकू उत्पादों से युवाओं को बचाने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है। वहीं दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में फिर से कड़े कानूनों का मजाक बनाया जा रहा है। दिसंबर 2017 के बाद अब भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले एक दिवसीय मैच के दौरान भी स्टेडियम को तंबाकू उत्पाद निर्माता कंपनियों के विज्ञापनों से सजाया जा रहा है। जबकि नियमों के अनुसार किसी भी तंबाकू उत्पाद निर्माता कंपनी की ओर से विज्ञापन करना गैरकानूनी है। फिर चाहे विज्ञापन पान मसाले से ही जुड़ा क्यों न हो।
बहरहाल इसे लेकर गुरुवार को दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक की ओर से दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) और भारत सरकार को पत्र लिखते हुए तत्काल संज्ञान की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) 2003 की धारा 5 के तहत कोई भी कंपनी अगर तंबाकू उत्पाद का निर्माण करती है तो वह विज्ञापन प्रसारित नहीं कर सकती। पान मसाले के विज्ञापन को सरोगेट के रुप में अधिनियम में शामिल किया है।
इसका मतलब यह है कि तंबाकू उत्पाद या पान मसाला किसी भी उत्पाद का प्रचार नहीं किया जा सकता। दिसंबर 2017 में भी दिल्ली सरकार की ओर से डीडीसीए को पत्र लिखा गया था, लेकिन उस वक्त मैच होने के बाद संज्ञान लिया गया था। अब सूत्रों से जानकारी मिलने के बाद तत्काल डीडीसीए को मैच से पहले ही विज्ञापनों पर रोक लगाने की अपील की है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा ने बताया कि कोटपा अधिनियम के तहत तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन करना गैरकानूनी है। कंपनियां पान मसाले की आड़ में विज्ञापन का खेल खेलती हैं। जबकि ये गलत है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 13 मार्च को होने वाले मैच में अगर विज्ञापन मिलते हैं तो इससे लाखों युवाओं को तंबाकू के प्रति बढ़ावा मिलेगा। जबकि ये सर्वविदित है कि देश में तंबाकू की वजह से कैंसर मरीजों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ रही है।
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि जन स्वास्थ्य के लिहाज से डीडीसीए को तत्काल इस पर कार्रवाई करनी होगी। अन्यथा इसे लेकर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी अधिनियम में है।