पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू करने के बाद मेवात में यह पहली बार होगा जब जिले की तीन सौ से अधिक पंचायतों में पढ़े लिखे प्रतिनिधि अपना परचम लहराएंगे।
सरकार के इस फैसले से जहां पढ़ी लिखी युवा पीढ़ी खुश है तो वहीं दूसरी ओर पुराने चौधरी इस बात से बेहद खफा हैं कि उनकी चौधराहट का युग अब समाप्त हो जाएगा।
प्रदेश की मनोहर लाल सरकार ने पंचायत चुनावों के ऐन मौके पर पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर शैक्षणिक योग्यता लागू कर दी थी, जिसके बाद प्रदेश के लाखों अनपढ़ पंच-सरपंच का चुनाव लड़ने से महरूम रह गए।
पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता की शर्त के बाद इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मेवात में देखने को मिला, जहां सौ फीसदी पंच सरपंचों में से केवल 10 फीसदी ही पढे़ लिखे हैं।
सरकार द्वारा पंचायती राज चुनावों में किए गए संशोधन के बाद से ही मेवात के पुराने चौधरी सरकार के इस फैसले से काफी नाराज हैं।
हालांकि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी डाली गई थी लेकिन वहां भी इन चौधरियों की दाल नहीं गली। इसके बाद अब यह मेवात में पहली बार होगा, जब तीन सौ से अधिक पंचायतों में पढ़े लिखे पंच सरपंच चुने जाएंगे।