हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़काने के आरोप में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने एक याचिका पर एफआईआर का आदेश दिया था।
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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कुमार के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। ऐसे में उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। उन्होंने निचली अदालत के न्यायाधीशों को आगाह किया कि वे ऐसे आदेश पारित करते समय सावधान रहें, क्योंकि इससे सांप्रदायिक वैमनस्य भड़क सकता है।
अदालत कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 18 फरवरी, 2020 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसमें पुलिस को हौजकाजी के लालकुआं में हिंसा भड़काने के लिए उनके और काशी के एक स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने कार्यकर्ता हर्ष मंदर की शिकायत पर यह आदेश दिया था।
जुलाई 2019 में दो व्यक्तियों के बीच पार्किंग विवाद के बाद लालकुआं के मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद रैलियां आयोजित की गईं और आरोप लगाया गया कि वहां नफरत फैलाने वाला भाषण दिया गया। याचिका में कुमार ने कहा था कि वे उस रैली में भी मौजूद नहीं थे जहां कथित भाषण दिए गए थे।