हाईकोर्ट ने विध्वंस पर रोक लगाने के अदालती आदेश के बावजूद एक घर पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की बुलडोज़र कार्रवाई की लाइव तस्वीरें देखकर हैरानी जताई। अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा कि कोई कानून-व्यवस्था है या नहीं? इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
मामला जाकिर नगर गली नंबर-12 निवासी नसीम अहमद के घर के बाहर डीडीए द्वारा चिपकाए गए तोड़फोड़ नोटिस से जुड़ा है। वकील तरुण राणा के माध्यम से दायर याचिका में नसीम ने कहा कि नोटिस में 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक आदेश के तहत झुग्गियों में आधे-पक्के घरों को ध्वस्त करने का जिक्र है। उन्होंने कहा कि उनकी बिल्डिंग उस श्रेणी में नहीं आती। उन्होंने दलील दी कि उनके पास बिजली कनेक्शन और अन्य दस्तावेज हैं। इस संबंध में अधिकारियों को रिपोर्ट दी गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। नसीम की ओर से पेश वकील तरुण राणा ने मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा से तत्काल सुनवाई की मांग की। मामला न्यायमूर्ति तारा विस्तार गंजू के समक्ष आया।
साथ ही विध्वंस स्थल पर संपत्ति का मालिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश हुआ और जेसीबी से विध्वंस कर रहे अधिकारियों की लाइव तस्वीरें दिखाईं। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को एक बजे पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर उपनिदेशक, पटवारी समेत अन्य अधिकारी दोपहर एक बजे कोर्ट में पेश हुए, लेकिन उनके पास पूरे घटनाक्रम पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।