जब दशरथ कैकयी को मनाने जाते हैं तो कहते है कि क्या किसी ने बदजुबानी की तुम्हारी शान में, कुछ कमी बाकी हुई क्या एश और आराम में।
क्या सबब है क्यूं पड़ी हो आज बाला जमीं, आरजू दिल में जो है बतलाओ ए मोह जदी। शहर के सेक्टर 16 स्थित श्रद्धा रामलीला में आयोजित रामलीला मंचन में राम वनवास, कैकयी कोप भवन, दशरथ मरण का मंचन किया गया।
दशरथ के संवाद पर कैकयी कहती है कि दर्द मेरा मत सुनो कुछ कहने के काबिल नहीं, कर सकोगे हल जिसे ऐसी मेरी मुश्किल नहीं। क्या कहूं राज ए दिल कहना महज बेकार है, पहल है सुनना मगर चलना बहुत दुश्वार है।
रामलीला कमेटी के सदस्य अनिल चावला ने बताया कि राम वनवास मंचन का गीत प्यारे वतन जग उजियारे वतन, प्यारी अयोध्या अलविदा वक्त है बुला रहा, फर्ज याद आ रहा। रघुवंश के नाम का, झंडा हम फहराएंगे। प्यारी अयोध्या अलविदा गाया गया। उसके बाद केवट द्वारा गंगा पार का दृश्य दिखाया गया।
श्री धार्मिक लीला कमेटी एम ब्लाक 5 नंबर में भरत मिलाप एवं सीता हरण का दृश्य दिखाया गया। भरत और शत्रुघ्र राम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या आते हैं, तो यह गीत राम भक्त ले चला राम की निशानी, सिर पै खड़ाऊं लिये आंखो में पानी दर्शकों का भाव विभोर कर गया।
निर्देशक हरीश चंद्र आजाद ने बताया कि आधुनिकता में हरे रंग का जंगल, लक्ष्मन रेखा एवं पंचवटी का दृश्य दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा था। सुपर्णखा के अभिनय में मोहित ने अपना जादू दर्शकों पर छोड़ा तो रावण बने तेजिंद्र खरबंदा के अभिनय को सराहा गया। राम का सीता के वियोग में विलाप का दृश्य दिखाया गया।
रावण-सुपर्णखा संवाद के तहत खर का संवाद नाक कटी नकटी हुई चेहरा लहू लुहान, बता री बहन सुपर्णखा तेरा किसने किया यह हाल तालियां बटोरने में सबसे आगे रहा।
सेक्टर 3 दशहरा रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला मंचन में सुबाहू मारीच वध, अहिल्या उद्धार, गंगा दर्शन, नगर दर्शन का दृश्य दिखाया गया। वृंदावन से आई रामलीला मंडली के मंचन को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए।
राम ने जब अहिल्या का उद्धार गुरु विश्वामित्र के कहने पर किया। सुबाहू मारीच का वध कर भगवान राम ने सभी साधु एवं भक्तों को अत्याचार से मुक्त कर दिया। तब जय श्री राम के जयकार लगे।