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प्रदूषण के रेड जोन में आधी दिल्ली: 16 जगह AQI 400 के पार, आप रोज ऐसे हो रहे बीमार; बचने के मात्र कुछ ही उपाय

Thu, 02 Nov 2023 10:42 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कान, नाक और गला विभाग के डॉक्टर संजय कुमार ने कहा कि प्रदूषण बढ़ने के कारण विषैले तत्व के कारण लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है।
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दिल्ली-एनसीआर को बीमार कर रहा प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदूषण बढ़ते ही आधी दिल्ली रेड जोन में पहुंच गई है। गुरुवार को 16 इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार चला गया। मुंडका में एक्यूआई सबसे ज्यादा 453 दर्ज किया गया। जो बेहद खराब श्रेणी में है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर को अगले दो दिनों तक प्रदूषण के खराब स्तर से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसमी दशाएं व हरियाणा-पंजाब से आती पराली के धुंए के कारण स्थिति और गंभीर होंगी। ऐसे में श्वास के मरीजों को विशेष रूप से सतर्क रहना होगा। इसके अलावा छोटे बच्चे व बुजुर्गों को विशेष ध्यान देना होगा।

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डॉक्टरों का कहना है कि एक्यूआई 400 के पार होने के साथ फेफड़ों को सामान्य के मुकाबले ज्यादा काम करना पड़ता है। ऑक्सीजन के साथ घुलकर शरीर में प्रवेश करने वाले विषैले तत्व को छानना मुश्किल हो जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुंआ, लेड, कार्बन मोनोऑक्साइड, पीएम 2.5 के महीन तत्व आसानी से फेफड़ों की छन्नी को पार कर जाते हैं। यह आसानी से खून में घुलकर दिल और दिमाग पर असर डालते हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने विशेष तौर पर मास्क पहनने की सलाह दी है।

वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक दिल्ली के 16 इलाके रेड जोन में पहुंच गए हैं। इनमें अलीपुर और आनंद विहार में एक्यूआई 449, द्वारका सेक्टर-8 में 435, जहांगीरपुरी में 422, मुंडका में 453, नजफगढ़ में 408, नरेला में 428, न्यू मोतीबाग में 417, ओखला फेस 2 में 405, पटपड़गंज में 401, पंजाबी बाग और बवाना में 445, आरके पुरम में 410, रोहिणी 441, शादीपुर में 401 और वजीरपुर में 425 दर्ज किया गया। यह दिल्ली के करीब आधे इलाके हैं। वहीं करीब 25 फीसदी दिल्ली के अन्य हिस्से हैं जहां पर एक्यूआई 400 के करीब पहुंचा हुआ है। बोर्ड का कहना है कि यदि हालत ऐसे ही रहे तो आपातकालीन स्थिति बन सकती है। अस्थमा, श्वास, दिल, दिमाग के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ सकती है।

बढ़ रही है श्वास के मरीजों की समस्या
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अंबरीश जोशी ने कहा कि धूल प्रदूषण की वजह सांस की समस्या बढ़ गई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के फेफड़ों में जमाव देखा जा रहा है। इसके अलावा हवाओं को पंप करने वाले टिशु में भी दिक्कत देखी जा रही है। यह गंभीर स्थिति हैं जिससे सांस लेने की क्षमता प्रभावित होती है।

आंखों में बढ़ रहा ड्राइनेस
एम्स के आरपी नेत्र विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. जीवन सिंह टिटियाल ने बताया कि प्रदूषण स्तर बढ़ने से आंखों में ड्राइनेस की समस्या बढ़ जाती है। प्रदूषण के साथ विषैले तत्व, लेड, कार्बन मोनोऑक्साइड, पराली का धुंआ के कारण आंखों की समस्या बढ़ा देता है। ऐसी स्थिति में आंखों से पानी आना, आंख लाल होना, एलर्जी बढ़ना जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे समय में आंखों का विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। इनके कारण आंखों की रोशनी तक जा सकती है।
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एलर्जी बढ़ा रही गले में खराश
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कान, नाक और गला विभाग के डॉक्टर संजय कुमार ने कहा कि प्रदूषण बढ़ने के कारण विषैले तत्व के कारण लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में गले में खराश सहित अन्य दिक्कत होती है। इससे बचने के लिए मास्क का प्रयोग करना चाहिए। कोशिश करना चाहिए कि प्रदूषण वाले जगहों पर न जाए।
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