जिले में प्रदूषण को कम करने के लिए जारी हुए गजट का असर दिखने लगा है। जिला प्रशासन ने 21 जनवरी के बाद पॉलीथिन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए कमेटिया गठित कर दी हैं।
दुकानदारों ने अभी से पॉलीथिन बंद कर कागज और कपड़े से बने बैग ग्राहकों से मंगाने शुरू कर दिए हैं। कुछ दुकानदारों ने ऐसे बैग बनवाने का ऑर्डर भी दे दिया है, जिनके लिए ग्राहकों से अलग चार्ज लिया जाएगा।
अमर उजाला ने रविवार को बाजार में पड़ताल की। पेश है व्यापारियों से बातचीत के कुछ अंश। दुकानदार विकास कुमार कहते हैं कि 20 जनवरी तक पॉलीथिन बंद करने के जिला प्रशासन की ओर से आदेश के बारे में जानकारी हुई थी।
जानकारी मिलते ही एक कंपनी को कागज के बैग बनाने का ऑर्डर दे दिया था। अब कागज के बैग में ही बुक्स और गिफ्टस दे रहे हैं। हालांकि पहले की अपेक्षा महंगा जरूर है लेकिन जुर्माना अदा करने की हिम्मत नहीं है।
कॉस्मेटिक दकानदार के मुताबिक कॉस्मेटिक के सामान छोटे-छोटे होते हैं ऐसे में बिना पॉलीथिन सामान नहीं दिया जा सकता है। पॉलीथिन का जो स्टॉक है उसे 20 जनवरी तक उनका इस्तेमाल करेंगी। 21 जनवरी तक वह कागज या कपड़े के बैग मंगा लेंगी और उन्हीं में सामान देंगी। इसकी कीमत भी ग्राहकों से ही वसूल करनी पड़ेगी।
कपड़ा दुकानदार कहते हैं कि अभी तक वह पॉलीथिन में ही कपड़े देते थे। मगर जब से प्रदूषण को कम करने की मुहिम और गजट के बारे में सुना है। उसी दिन से पॉलीथिन बंद करके कागज के बैग मंगा लिए हैं। कपड़े के बैग बनने के लिए ऑर्डर दे दिया है।