एक तरफ प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी लिखित में कह रहे हैं कि नोटिफिकेशन होने से पहले गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करना गलत है तो दूसरी ओर कुछ संस्थान अति उत्साह में सत्ता में बैठे नेताओं की वाहवाही लूटने के लिए गुरुग्राम लिखने पर आमादा हैं।
अमेरिकी कंपनी बोस्टन साइंटिफिक ने गुरुग्राम ब्रांड को अपना लिया है। इसके बाद गुड़गांव टू ‘गुरुग्राम’ को लेकर साइबर सिटी के कॉरपोरेट जगत में नई बहस छिड़ गई है। जब से प्रदेश सरकार ने गुड़गांव को गुरुग्राम घोषित किया है तभी से कॉरपोरेट और आईटी सेक्टर इसका मुखर विरोधी रहा है। मगर अब स्थितियां बदलने लगी हैं। बोस्टन ने अपने आरएंडडी सेंटर के उद्घाटन मौके पर ‘गुरुग्राम’ को अपनाया।
बोस्टन के इस रुख से अगर कोई सबसे ज्यादा उत्साहित है तो वह प्रदेश सरकार है। शहर के सेक्टर-48 में कंपनी के आरएंडडी सेंटर के उद्घाटन मौके पर जब प्रदेश के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु सिंह ने मंच पर जब गुड़गांव के स्थान पर गुरुग्राम लिखा देखा तो उनकी खुशी देखने लायक थी।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि इससे पूरी दुनिया को पता चल जाएगा कि वर्तमान गुड़गांव कोई 10-20 साल पुराना शहर नहीं है, बल्कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। इसका जुड़ाव महाभारत काल से है। ब्रांड के नाम से ही शहर की पहचान होती है, ब्रांड जितना पुराना होगा उसकी विश्वसनीयता भी उतनी ही अधिक होती है।
अप्रैल में जब प्रदेश सरकार ने ‘गुरुग्राम’ नाम घोषित किया था तब आईटी-बीपीओ और कॉरपोरेट ने इसे अपने लिए कमर तोड़ने वाला बताया था। उनका कहना था कि गुरुग्राम को ब्रांड बनाने में इन्हें अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में हजारों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। क्योंकि इन देशों में गुड़गांव ब्रांड चलता है।
मगर अब इस अमेरिकी कंपनी द्वारा ‘गुरुग्राम’ को अपनाने से नया मोड़ आ गया है। ‘गुरुग्राम’ के समर्थकों का कहना है कि जब एक विदेशी कंपनी ‘गुरुग्राम’ को अपना सकती है तो इसका विरोध देश में नहीं होना चाहिए। हर्वा बीपीओ के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि अगर कोई कॉरपोरेट कंपनी इस नाम को अपना रही है तो इसका जरूर सकारात्मक संकेत जाएगा।