मलिका उच्च रक्तचाप, हाइपोथायरॉयड और हृदय संबंधी विकारों से भी ग्रस्त थी। इंस्टीट्यूट, गाइनी एवं ओंकोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी की प्रिंसीपल डायरेक्टर तथा एचओडी डॉ रमा जोशी के नेतृत्व में सर्जनों की एक टीम ने सर्जरी की।
गुरुग्राम की चिकित्सा तकनीक ने एक 54 वर्षीय उज्बेक महिला को नई जिंदगी प्रदान की है। गर्भाशय कैंसर से जूझ रही उक्त महिला की फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में सफल रोबोटिक सर्जरी की गई है। इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने 135 किलोग्राम वजन की उज्बेक महिला मलिका के शरीर में गर्भाशय कैंसर का ट्यूमर निकालने में पांच घंटे से अधिक का समय लिया।
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मलिका उच्च रक्तचाप, हाइपोथायरॉयड और हृदय संबंधी विकारों से भी ग्रस्त थी। इंस्टीट्यूट, गाइनी एवं ओंकोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी की प्रिंसीपल डायरेक्टर तथा एचओडी डॉ रमा जोशी के नेतृत्व में सर्जनों की एक टीम ने सर्जरी की।
डॉ. रमा जोशी ने बताया कि इस मरीज का इलाज उनके मोटापे और अन्य रोगों तथा सर्जरी के इतिहास के चलते हमारी लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन सबसे ज्यादा चुनौती उनके अत्यधिक मोटापे के कारण तकनीकी सीमाओं को पार करने की थी।
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हमने मामले की जांच और उपचार की प्रक्रिया का सावधानी से मूल्यांकन करने के बाद रोबोट की सहायता से सर्जरी करने का फैसला किया ताकि सर्जरी के दौरान न्यूनतम रक्तस्राव हो और शीघ्र स्वास्थ्यलाभ दिया जा सके। यह सर्जरी 5 घंटे में पूरी हुई। दो दिनों के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दी गई।
मलिका ने कहा कि वह एक दशक से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रही हैं। नियमित अंतराल पर कई सर्जरी करा चुकी है। महामारी की दूसरी लहर के बीच मुझे गर्भाशय के कैंसर का पता चला, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सर्जरी के लिए भारत आना एकमात्र रास्ता था। उन्होंने डॉ. रमा जोशी के नेतृत्व में सर्जनों की टीम की आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीम ने मुझे एक नया जीवन प्रदान किया है।