गुरुग्राम। शहर में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए शासन-प्रशासन अब एयर प्यूरीफायर (वायु शोधक) का सहारा ले रहा है। बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) अभी तक 71 एयर प्यूरीफायर लगा चुका है। अब 42 और लगाने की तैयारी की जा रही है। पूरा प्रोजेक्ट सीएसआर के तहत जीएसके कंज्यूमर हेल्थकेयर लिमिटेड संभाल रही है। संचालन और रखरखाव का कार्य भी उन्हीं की देखरेख में किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पिछले साल अगस्त में शुरू किया गया था। दावा किया जा रहा है कि इससे प्रदूषण को 40 से 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है। पिछले साल 11 नवंबर को भारतीय प्रदूषण नियंत्रण संघ (एसोसिएशन) के कार्यक्रम ‘एयर केयर’ को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लांच किया था। इसके तहत शहर की आबोहवा शुद्ध करने का बीड़ा उठाया गया था। यही कारण है कि एक साल में पूरे शहर में 71 यंत्र लगाए गए हैं।
स्थानों को किया गया चिह्नित
एयर प्यूरीफायर लगाने के लिए रेड लाइट या ज्यादा ट्रैफिक के दबाव वाले क्षेत्रों का चयन किया गया है, जहां प्रदूषण अपेक्षाकृत अधिक है। एक अध्ययन के अनुसार एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने का 40% कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है जिसे ध्यान में रखते हुए यह परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत अब तक इफ्को चौक पर 15, सिकंदरपुर मेट्रो स्टेशन के पास 12, सेक्टर-44 के निकट रेड लाइट एरिया में 6, मेदांता पर 8, बख्तावर चौक 8, मैक्स हॉस्पिटल 7, एआईटी चौक 8, सेक्टर-54 मेट्रो स्टेशन 6 और जीएमडीए सेक्टर-44 में एक यंत्र लगाया गया है।
फिल्ट्रेशन सिद्धांत पर काम करता है वायु शोधक
एसोसिएशन की डिप्टी डायरेक्टर राधा गोयल के मुताबिक एयर प्यूरीफायर फिल्ट्रेशन (छानने का काम) सिद्धांत पर काम करता है। लगभग 5 फुट ऊंचाई के इस यंत्र में एग्जॉस्ट लगा है जो वातावरण में प्रदूषण फैलाने वाले कणों को सोखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनके माध्यम से आसपास के प्रदूषण को 40% से 50% तक कम किया जा सकता है। एसोसिएशन इनका तीन साल तक संचालन और रखरखाव करेगी।
जीएमडीए की ओर से शहर के प्रदूषण को थामने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस परियोजना की शुरुआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 11 नवंबर 2020 में की थी। ऐसे प्रयासों के साथ ही धरातल पर भविष्य के लिए भी प्रयास करने होंगे। अधिक से अधिक पौधरोपण करें। यदि प्रदूषण के स्तर को समय रहते नियंत्रित करने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में निश्चित तौर पर ही इसके परिणाम भयावह होंगे। - सुभाष यादव, एडिशनल सीईओ, जीएमडीए