गुरुग्राम में केंद्रीय राज्यमंत्री, योजना (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने ‘अमर उजाला’ की खबर पर संज्ञान लेते हुए संरचनात्मक अभियांत्रिकी (स्ट्रक्चरल इंजीनियर) का सरकारी स्तर पर एक पैनल बनाने की पैरवी की है। उन्होंने कहा है कि भविष्य में चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी जैसा हादसा न हो, इसके लिए गंभीरता से योजनाएं अमल में लानी होंगी। चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी हादसे के बाद वह वरिष्ठ अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट लेने गुरुग्राम आए थे।
हादसे के बाद ‘अमर उजाला’ ने 12 फरवरी के अंक में ओसी नियमों में लापरवाही दर्शाती खबर प्रकाशित की थी। जिसमें बिल्डर को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया का पूरा खुलासा किया गया था। पहले नियम के मुताबिक बिल्डर की ओर से नियुक्त संरचनात्मक अभियंता एक प्रमाण पत्र पर अपनी मुहर लगाकर ओसी के लिए आवेदन करता था और आसानी से ओसी मिल जाती थी।
इस खबर के बाद प्रदेश सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए ओसी से पूर्व संरचनात्मक ऑडिट कराने की घोषणा पहले ही कर दी है। अब केंद्रीय योजना मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए संरचना अभियंताओं का पैनल बनाने की बात कही है।
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि अभी तक संरचनात्मक अभियंता बिल्डर से पैसे लेकर अपनी चिट्ठी दे देता था। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के पास कोई चारा ही नहीं बचता। जब फाइल की औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं, उसको ओसी जारी करनी पड़ती है। इसमें बदलाव करना होगा।
ओसी के लिए उसी संरचनात्मक अभियंता की प्रमाणिकता होनी चाहिए जो पैनल में शामिल हो। उन्होंने बताया कि आईआईटी के संरचना अभियंताओं का एक पैनल या बोर्ड बनाकर उनकी प्रमाणिकता के आधार पर ही बिल्डर को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) देने का प्रावधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार के पैनल पर ऐसे संरचनात्मक अभियंता की सूची होनी चाहिए जो बिल्डर की ओर से ओसी के लिए आवेदन करते हैं। इसके लिए एक बोर्ड या पैनल बनाया जाएगा। भविष्य में किसी भी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के लिए ओसी आवेदन, पैनल में शामिल संरचना अभियंता ही कर सकेंगे। बिल्डर की ओर से निजी तौर पर नियुक्त संरचना अभियंता की प्रमाणिकता पर ओसी नहीं दी जाएगी। इससे पारदर्शिता आएगी और लोगों में विश्वास बढ़ेगा।